राजा भैया पर लगा षड्यंत्र रचने का आरोप

–    एडीजी ने दिया निष्पक्ष जांच का आदेश

–    मंडलायुक्त और आईजी ने जाहिर की शर्मिंदगी

रघुराज प्रताप सिंह "राजा भैया"
रघुराज प्रताप सिंह “राजा भैया”

प्रतापगढ़ जिले में हथिगवां थाना क्षेत्र के गाँव बलीपुर में हुई दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में मातमी सन्नाटा है। कोई स्तब्ध है, तो कोई दुखी। किसी का हृदय रो रहा है, तो किसी की आँखों से आसुओं के झरने रोके नहीं रुक रहे। आम आदमी से लेकर वरिष्ठ अधिकारी तक एक-दूसरे की ओर निहारने से अधिक और कुछ नहीं कर पा रहे हैं, इसीलिए लोगों का आक्रोश और बढ़ गया।

पुलिस क्षेत्राधिकारी जियाउल हक को श्रद्धांजलि देने पहुंचे उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) अरुण कुमार को दिवंगत सीओ के परिजनों के साथ जनाक्रोश का भी सामना करना पड़ा। आक्रोशित लोगों ने एडीजी को घेर कर मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और राजा भैया के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की, जिससे अफरातफरी का माहौल बन गया। आक्रोशित परिजनों का आरोप था कि सीओ की हत्या कराई गई है, लेकिन स्थानीय पुलिस हत्या मानने को तैयार नहीं है। आक्रोशित परिजनों की मांग थी कि नया मुकदमा दर्ज कर हत्या की जांच हो, तभी सीओ को अंतिम विदाई दी जाए। इस पर एडीजी ने निष्पक्ष कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया, तो ही आक्रोशित परिजनों ने शव उठाने दिया, इसके बाद दिवंगत सीओ की पत्नी डा. परवीन आजाद की ओर से तहरीर दी गई, जिसमें आरोप है कि खाद्य मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया के कहने पर उनके गुर्गो ने सीओ की हत्या की है।

उधर मंडलायुक्त देवेश चतुर्वेदी और आईजी इलाहाबाद जोन आलोक शर्मा को भी आक्रोशित परिजनों के साथ स्थानीय नेताओं ने घेर लिया और सपा सरकार के विरुद्ध जमकर नारे लगाए। घटना से दुखी कमिश्नर और आईजी ने कहा कि अपने साथी की मौत का उन्हें परिजनों से कम दु:ख नहीं है, साथ ही अपने ही सीओ की रक्षा न कर पाने का दर्द वह किससे क्या कहें? शर्मिन्दगी जाहिर करते हुए उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच कराने की भी बात कही।

एक वर्ष पहले ही हुआ था निकाह

दिवंगत सीओ और डा. परवीन आज़ाद प्रेमी थे, दोनों का परिजनों की मर्जी से निकाह हुआ था। 21 फरवरी को ही प्रथम वर्ष गाँठ गुजरी है। सपने बुनने की उम्र में बवालियों ने डा. परवीन को ऐसा दुःख दे दिया, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। डा. परवीन की हालत देख कर लोग रोये बिना रह नहीं सके। अधिकाँश लोग यही कह रहे थे कि क़ानून चाहे जो करे, पर परवीन की आह बलवाइयों को चैन से जीने नहीं देगी।

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