यूके में 90 करोड़ के पुल पर 124 करोड़ खर्च, पर नतीजा शून्य

यूके में 90 करोड़ के पुल पर 124 करोड़ खर्च, पर नतीजा शून्य
यूके में 90 करोड़ के पुल पर 124 करोड़ खर्च, पर नतीजा शून्य

                किरन कांत

उत्तराखंड सरकार एक तरफ आपदा आने के कारण अभी तक आर्थिक सहायता की मांग रही है और दूसरी तरफ 90 करोड़ की लागात से बनने वाले पुल पर 124 करोड़ रूपये लुटा चुकी है और पुल अब भी अधूरा ही है। इस अजब घोटाले की गजब कहानी उत्तराखंड की कांग्रेस सरकार ने ही रची है।

उत्तराखंड के टिहरी शहर के लोगों ने पुल के लिए आंदोलन किये, तो उस समय भाजपा सरकार ने सबसे बड़ी झील के ऊपर टिहरी से प्रतापनगर को जोड़ने वाले पुल को बनाने की मंजूरी दे दी। तमाम औपचारिकताओं के बाद वर्ष 2011 में निर्माण कार्य शुरू भी हो गया। स्टीमेट के अनुसार पुल की कुल लागात 90 करोड़ रूपये रखी गयी थी। पुल के निर्माण का ठेका पंजाब की एक बड़ी कम्पनी को दिया गया था।

इसी पुल के संबंध में टिहरी निवासी एक आरटीआई कार्यकर्ता राजेश्वर पेन्यूली ने जन सूचना अधिकार अधिनियम- 2005 के तहत जानकारी मांगी, तो चौंकाने तथ्य सामने आये हैं। जिस पुल का अभी तक ठीक से एक हिस्सा भी खड़ा नहीं हुआ है, उस पुल के निर्माण पर सरकार ने कार्यदायी कम्पनी को 124 करोड़ रूपये भुगतान कर दिए हैं।

गौरतलब है कि टिहरी से प्रतापनगर का सफ़र तय करने के लिए अभी यहाँ के लोगों को करीब 40 किलोमीटर का सफ़र तय करना पड़ता है और इस पुल के बन जाने के बाद पुल पार करने भर का सफ़र रह जायेगा, यह पुल बन गया होता, तो अब तक कई क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर विकास नज़र आ रहा होता, लेकिन पुल के नाम पर सरकार आम जनता के साथ मज़ाक करती नज़र आ रही है, वहीँ जिम्मेदार लोग मौज ले रहे हैं। राजेश्वर को मिली सूचना के तहत खुलासा हुआ है कि सम्बंधित विभाग के अधिकारी इस पुल के ब्लू प्रिंट के लिए विदेशी एजेंसियों के साथ वार्ता करने के उद्देश्य से कई बार विदेश यात्रा तक कर आये हैं।

उत्तराखंड में फिलहाल काँग्रेस की सरकार है, जिसकी शह पर घोटाले और लापरवाही की नई इबारतें लिखी जा रही हैं, लेकिन पुल की मंजूरी देने वाली प्रमुख विपक्षी पार्टी को भी आम जनता की परेशानियों और विकास से कुछ लेना नहीं है, वरना उसे पता होता कि पुल के निर्माण के नाम पर क्या खेल चल रहा है। इस प्रकरण में अधिकारी भी कुछ कहने और बताने को तैयार नहीं हैं। अब देखने की ख़ास बात यह है कि घोटाले की पूरी कहानी सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस और भाजपा क्या कदम उठाते हैं?

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