मुख्यमंत्री ने बाल रेल का हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया

  •  प्रदेश सरकार राज्य के वन क्षेत्र को बढ़ाने तथा वन्य प्राणियों को संरक्षण देने के लिए लगातार प्रयासरत 
 
  • प्रदेश की समाजवादी सरकार की सभी योजनाएं जनता को लाभ पहुंचाने वाली: मुख्यमंत्री 
  • राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए तेज एवं बेहतर कनेक्टिविटी की सड़कें आवश्यक हैं
  • आई.टी. पार्कों के विकास, संचालन तथा अनुरक्षण के लिए दिशा-निर्देश तय
 
  • बस्ती, फिरोजाबाद, बहराइच और फैजाबाद मेडिकल कॉलेज की स्थापना हेतु चिन्हित
लखनऊ प्राणि उद्यान में नवीन बाल रेल के परिचालन का हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।
लखनऊ प्राणि उद्यान में नवीन बाल रेल के परिचालन का हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज यहां लखनऊ प्राणि उद्यान में नवीन बाल रेल के परिचालन का हरी झण्डी दिखाकर शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस रेल के चलने से बच्चों को चिड़ियाघर घूमने और इसकी सवारी करने का एक रोमांचक अनुभव होगा। बच्चों के लिए चिड़ियाघर एक बड़ा आकर्षण होता है। ऐसे में अगर यहां पर अच्छी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, तो यहां पर आने वालों की संख्या में इजाफा होगा।
श्री यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के वन क्षेत्र को बढ़ाने तथा वन्य जीवों को संरक्षण देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिसमें वन विभाग पूरा सहयोग दे रहा है। उन्होंने कहा कि वन्य क्षेत्र बढ़ाने के लिए सरकार ने ग्रीन बेल्ट लगाने का निर्णय लिया। इसके अन्तर्गत अब तक इटावा में 1000 एकड़ क्षेत्र में  पौधे लगाए गए हैं, जो लगातार पल्लवित हो रहे हैं। इसी प्रकार झांसी के बबीना क्षेत्र में भी पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने भी पेड़ लगवाए थे, परन्तु आज उनका कहीं अता-पता नहीं है।
इटावा में स्थापित की जा रही लायन सफारी पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक अनोखी और विश्वस्तरीय सफारी होगी और इससे पर्यटक उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित होंगे। उन्होंने कहा कि वन विभाग एक महत्वपूर्ण विभाग है और इसके माध्यम से पर्यावरण संतुलन को बनाए रखा जा सकता है। इस विभाग के माध्यम से नए कार्यों की संभावनाएं तलाशी जाएंगी और इसमें व्याप्त थोड़ी बहुत कमियों को दूर किया जाएगा।
श्री यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार की सभी योजनाएं जनता को लाभ पहुंचाने वाली हैं। सरकार ने कन्या विद्या धन योजना, बेरोजगारी भत्ता, किसान दुर्घटना बीमा योजना, लैपटॉप वितरण तथा इस तरह की अन्य जनहितकारी योजनाएं लागू करके जनता को लाभान्वित करने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अपने दो वर्ष के कार्यकाल में कई ऐसे निर्णय लिए हैं, जो अभूतपूर्व हैं और जिनकी नकल अब दूसरे राज्य भी कर रहे हैं। राज्य सरकार ने 12वीं पास छात्रों को लैपटॉप बंटवाकर ज्ञान की खाई को पाटने का कार्य किया है। बेरोजगारी भत्ता उपलब्ध कराने से बेरोजगार लोग अपने कुछ कार्य कर पा रहे हैं। पढ़ने वाली छात्राओं को आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए कन्या विद्या धन जैसी योजना लागू की गई है, जबकि किसानों को सुरक्षा प्रदान करने की दृष्टि से किसान दुर्घटना बीमा लागू की गई है। इसी प्रकार 108 समाजवादी एम्बुलेंस सेवा तथा 102 नेशनल एम्बुलेंस सेवा का लाभ शहरों के अलावा दूरदराज के गांवों में भी लोगों को मिल रहा है। समाजवादी पेंशन योजना के माध्यम से लोगों को लाभान्वित किया जा रहा है और बड़ी संख्या में परिवार इसका लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने अभूतपूर्व प्रयास किए हैं, जिसके फलस्वरूप अब मरीजों को मुफ्त दवा, इलाज, जांच इत्यादि की सुविधा मिल रही है।
श्री यादव ने कहा कि सरकार उत्तर प्रदेश को वापस पटरी पर लाने के लिए अथक प्रयास कर रही है, जिसमें सभी विभाग अपना सहयोग दे रहे हैं। यह पहली सरकार है, जो वर्ष की शुरुआत में ही विकास का एजेण्डा तय कर देती है। सरकार प्रदेश को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने के सारे प्रयास करती रहेगी।
इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर बाल रेल का शुभारम्भ किया तथा उसमें बैठकर कुछ दूर की यात्रा भी की। मुख्यमंत्री का स्वागत प्रमुख सचिव वन वी0एन0गर्ग ने बुके भेंट कर किया।
कार्यक्रम को राज्यमंत्री वन एवं जन्तु उद्यान डा. शिव प्रताप यादव ने भी सम्बोधित किया। उन्होंने अपने सम्बोधन में बताया कि पिछली बाल रेल वर्ष 1969 में चलाई गई थी, जबकि इस नई ट्रेन का शुभारम्भ मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा आज किया गया है। उन्होंने बताया कि इस ट्रेन के लिए नया ट्रैक बनाया गया है। उन्होंने पीलीभीत में टाईगर रिजर्व स्थापित किए जाने के लिए सहमति देने के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि लखनऊ के कुकरैल क्षेत्र में एक जैव विविधता सेण्टर, टाईगर सेण्टर तथा 50 एकड़ क्षेत्र में प्राणि उद्यान की स्थापना की जाएगी। शीघ्र ही कानपुर प्राणि उद्यान में भी बाल रेल चलाने की व्यवस्था की जाएगी।
इस अवसर पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन, कारागार मंत्री राजेन्द्र चौधरी, कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के अतिरिक्त मुख्य सचिव जावेद उस्मानी, कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राकेश गर्ग, सचिव वन पवन कुमार, प्रमुख वन संरक्षक जे0एस0अस्थाना, प्रमुख वन संरक्षक डा0 रूपक डे सहित शासन-प्रशासन तथा वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम के उपरान्त मुख्यमंत्री तथा मंत्रिगणों को स्मृति चिन्ह भी भेंट किए गए।
 
प्रदेश में राज्य राजमार्गों, बाईपास एवं अन्य मुख्य मार्गों को सार्वजनिक-निजी सहभागिता से विकसित करने हेतु उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग विकास कार्यक्रम का गठन
 
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि बेहतर सड़कों का विकास से सीधा रिश्ता है। राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए तेज एवं बेहतर कनेक्टिविटी की सड़कें आवश्यक हैं। प्रदेश की जनसंख्या एवं ट्रैफिक में हुई वृद्धि को देखते हुए भी टिकाऊ एवं उच्च गुणवत्ता की सड़कों का निर्माण किया जाना जरूरी है। प्रदेश में राज्य राजमार्गों एवं अन्य मुख्य मार्गांे का एक बड़ा नेटवर्क पहले से मौजूद है। उसे और भी सुदृढ़ किया जाना समय की आवश्यकता है। इस जरूरत को ध्यान में रखते हुए शासन ने प्रदेश में राज्य राजमार्गों, बाईपास एवं अन्य मुख्य मार्गों को सार्वजनिक-निजी सहभागिता से विकसित करने के लिए ‘उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग विकास कार्यक्रम’ का गठन किया है।
यह जानकारी देते हुए आज यहां एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि तीव्र एवं सुगम यातायात, कृषि, औद्योगिक तथा उपभोक्ता उत्पादों के तेजी से परिवहन एवं विकास के लिए भी राज्य की सड़कों के नेटवर्क को बेहतर बनाया जाना जरूरी है। राज्य सरकार के सीमित संसाधनों को देखते हुए राज्य राजमार्गों, बाईपास एवं अन्य मुख्य मार्गों का विकास सार्वजनिक-निजी सहभागिता के तहत टोल एकत्रीकरण पद्धति के माध्यम से किया जाएगा। इसके सुनियोजित एवं त्वरित विकास के लिए दीर्घकालिक कार्यक्रम बनाये जाने की आवश्यकता है। इसके मद्देनजर उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग विकास कार्यक्रम का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
प्रवक्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण के प्रस्ताव पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कई बैठकों में विचार-विमर्श तथा लोक निर्माण विभाग द्वारा परीक्षण एवं परिमार्जन के उपरान्त इस कार्यक्रम को तैयार किया गया है। इस कार्यक्रम के दो भाग हैं, जिसके तहत प्रदेश के कुल 86 मार्गों के कार्य सार्वजनिक-निजी सहभागिता के माध्यम से उपशा द्वारा सम्पादित किए जाएंगे। पहले भाग के तहत मार्गों का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। इसे पांच चरणों में पूरा किया जाएगा। इसके तहत कुल 58 मार्गों पर काम किया जाना प्रस्तावित है। दूसरे भाग के तहत राज्य के कुल 28 प्रमुख शहरों में बाईपास का निर्माण किया जाएगा।
सरकारी प्रवक्ता ने यह भी बताया कि कार्यक्रम के पहले भाग के 58 मार्गों में से 20 मार्गों को चारलेन कैरिज-वे तथा शेष 38 मार्गांे को दो-लेन  विद पेव्ड शोल्डर कैरिज-वे के अनुसार विकसित किया जाएगा। कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पी0पी0पी0) हेतु जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार सक्षम स्तर से अनुमति प्राप्त करना जरूरी होगा। किसी भी परियोजना पर कार्यवाही प्रारम्भ करने से पहले उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा लोक निर्माण विभाग की सहमति भी प्राप्त करनी होगी।
प्रवक्ता ने बताया कि भाग एक के पहले चरण में प्रस्तावित पांच परियोजनाओं में से चार परियोजनाओं, दिल्ली-सहारनपुर यमुनोत्री मार्ग (एस0एच0-57), बरेली-अल्मोड़ा मार्ग (एस0एच0-57), वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग (एस0एच0-5ए), मेरठ-करनाल मार्ग (एस0एच0-82) के अनुबन्ध उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा गठित किए जा चुके हैं तथा नियत तिथि भी निर्गत की जा चुकी है। जबकि प्रथम चरण की परियोजना लखनऊ-हरदोई-शाहजहांपुर मार्ग (एस0एच0-25)  तथा द्वितीय चरण की परियोजनाओं अलीगढ़-मथुरा मार्ग (एस0एच0-80), एटा-शिकोहाबाद मार्ग (एस0एच0-85), ताड़ीघाट-बारा मार्ग (एस0एच0-99), मुजफ्फरनगर-सहारनपुर वाया देवबन्द मार्ग (एस0एच0-59), बलरामपुर-गोण्डा-जरवल मार्ग (एस0एच0-1ए), अकबरपुर-जौनपुर मिर्जापुर-दुद्धी मार्ग परियोजनाओं के लिए रेक्वेस्ट फार प्रपोजल (आर0एफ0पी0) की कार्यवाही प्रगति में है। तृतीय चरण की परियोजनाओं हेतु फिजीबिलटी अध्ययन की प्रक्रिया चल रही है। चतुर्थ चरण, पंचम चरण तथा बाईपास निर्माण योजना पर कार्यवाही अभी होनी है।
सरकारी प्रवक्ता बताया कि इन परियोजनाओं के अलावा प्रदेश में लोक निर्माण विभाग के अन्य मार्गों का भी बड़ा रोड नेटवर्क है। सीमित बजट के कारण इन मार्गाें के उचित रख-रखाव में समस्या आ रही है। इसलिए इन मार्गों का रख-रखाव सार्वजनिक-निजी सहभागिता के तहत ओ0एम0टी0 (आपरेशन मेन्टेनेन्स एण्ड ट्रांसफर) पद्धति द्वारा किया जाएगा। रख-रखाव के लिए मार्गों का चयन लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जाएगा।
राज्य के नौजवानों को रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी सेक्टर पर गम्भीरता से काम किया जा रहा है: मुख्यमंत्री
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि राज्य के नौजवानों को प्रदेश में ही रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी सेक्टर पर गम्भीरता से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पर्याप्त तकनीकी शिक्षण संस्थाओं की संख्या का लाभ उठाते हुए गुणवत्तायुक्त मानव संसाधन विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। इसीलिए मंत्रिपरिषद ने आई.टी. पार्कों के विकास, संचालन तथा अनुरक्षण के लिए तैयार दिशा-निर्देश को मंजूरी प्रदान की है। राज्य सरकार के इस कदम से आगे आने वाले समय में सूचना प्रौद्योगिकी सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि लखनऊ नगर में एच.सी.एल. द्वारा 100 एकड़ भूमि में आई.टी. सिटी का विकास किया जा रहा है। सरकार के इन फैसलों से राज्य को आई.टी. हब बनाने में मदद मिलेगी।
यह जानकारी देते हुए सरकार के प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि मुख्यमंत्री ने टियर-2 तथा 3 शहरों के विकास प्राधिकरणों को इस दिशा में जरूरी कदम उठाते हुए कम से कम 01 आई0टी0 पार्क विकसित करने के लिए कहा है ताकि प्रदेश के नौजवानों को रोजी-रोटी के लिए अन्य प्रदेशों में जाने की जरूरत न पड़े और राज्य की आर्थिक स्थिति में सुधार हो।
प्रवक्ता ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी व्यवसाय को बढ़ावा देने, निजी क्षेत्र में से पूंजी निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन तथा राज्य के समग्र सामाजिक एवं आर्थिक विकास हेतु प्रदेश सरकार द्वारा पहले ही उ0प्र0 सूचना प्रौद्योगिकी नीति- 2012 लागू की जा चुकी है। इस नीति के तहत अत्याधुनिक तकनीक से युक्त आई.टी. पार्क की स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी। आई.टी. पार्क का निर्माण न्यूनतम लगभग 15000 वर्ग मीटर फ्लोर एरिया में किया जा सकता है। राज्य में स्थापित होने वाले ऐसे आई.टी. पार्कों को स्टेप-अप (साफ्टवेयर एवं टेक्नोलाजी अन्ट्रपिन्योर पार्क उ0प्र0) घोषित किया जाएगा।
प्रवक्ता ने बताया कि मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता में 10 जुलाई, 2013 को समस्त सम्बन्धित पक्षों के साथ बैठक में इन परियोजनाओं हेतु दिशा-निर्देश तैयार किए गए थे, जिसे मंत्रिपरिषद ने 26 फरवरी, 2014 को मंजूर कर लिया। इसके तहत विकास एजेंसी (जिसका तात्पर्य विकास प्राधिकरण, औद्योगिक विकास प्राधिकरण तथा उ0प्र0 राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों से है) के स्वामित्व वाली भारमुक्त भूमि अथवा राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत नगरीय संकुल के समीप भूमि को चिन्हित किया जाएगा। भूमि चिन्हित करने के उपरान्त आई.टी. पार्क विकसित करने हेतु विकास एजेंसी अन्य समस्त औपचारिकताओं को पूरा करते हुए भू उपयोग बदलने तथा परियोजना के विन्यास, निर्माण, वित्त पोषण, परिचालन तथा अनुरक्षण कार्यों के लिए स्वयं अथवा निजी क्षेत्र की भागीदारी के माध्यम से पर्याप्त निधियां एवं संस्थागत क्षमता उपलब्ध कराएगी। परियोजना की रूपरेखा बनाने तथा निजी क्षेत्र से भागीदार के चयन हेतु बिड प्रक्रिया का उपयोग करके प्रतिष्ठित एवं अनुभवी वित्तीय परामर्शदाता/कारोबार सलाहकार नियुक्त किया जाएगा। परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण होने पर विकास एजेंसी/डेवलपर द्वारा स्वतंत्र अभियंता से पूर्णतः प्रमाण पत्र एवं अनुपालन प्रमाण पत्र प्राप्त किया जाएगा।
प्रवक्ता ने बताया कि आई.टी. पार्कों की स्थापना हेतु राज्य सरकार ने 04 विकास माडलों को मंजूरी प्रदान की है। इसके तहत विकास एजेंसी द्वारा स्वयं के स्रोतों या साफ्टवेयर टेक्नोलाॅजी पार्क आफ इण्डिया (एस.टी.पी.आई.) के सहयोग से आई0टी0 पार्क विकसित किया जाएगा। इसके अलावा डिज़ाइन, बिल्ट, फाइनेंस, आपरेट एण्ड ट्रांसफर (डी.बी.एफ.ओ.टी.) के आधार पर निजी क्षेत्र से सहयोग लिया जा सकता है। चैथे विकास माडल के रूप में किसी आई.टी. पार्क के विकास के लिए संयुक्त उद्यम (ज्वाइंट वेंचर) का सहारा भी लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य के टियर-2 तथा टियर-3 शहरों में 31 मार्च, 2017 को समाप्त होने वाली अवधि तक सूचना प्रौद्योगिकी/सूचना प्रौद्योगिकी जनित सेवा क्षेत्र की नई इकाईयों को उ0प्र0 सूचना प्रौद्योगिकी नीति-2012 के तहत अनुमन्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। ज्ञातव्य है कि टियर-2 में 20 लाख से अधिक आबादी वाले नगर तथा लखनऊ, आगरा, कानपुर, इलाहाबाद एवं मेरठ शहर आते हैं। जबकि टियर-3 में 20 लाख से कम जनसंख्या वाले नगर आच्छादित किए गए हैं।
उ0प्र0 सरकार ने स्वास्थ्य मंत्रालय की योजना के क्रम में नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना के 4 जनपद चिन्हित किए
उत्तर प्रदेश सरकार ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की योजना के क्रम में 04 जनपदों को चिन्हित किया है, जहां नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा सकते हैं। ये जिले हैं-बस्ती, फिरोजाबाद, बहराइच और फैजाबाद, जिनके मौजूदा जिला चिकित्सालयों के साथ मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा सकती है। मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री गुलाम नबी आजाद को गत 21 फरवरी को भेजे गए अपने पत्र में उन्हें राज्य सरकार के मंतव्य से अवगत करा दिया है।
यह जानकारी आज यहां देते हुए एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री को सम्बोधित अपने पत्र में उल्लिखित किया उत्तर प्रदेश एक विशाल राज्य है। यहां मेडिकल काॅलेजों की संख्या एवं स्थान आबादी की जरूरतों के मुताबिक नहीं है। मेडिकल की स्नातक स्तर की शिक्षा के दृष्टिकोण से उ0प्र0 ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान, सैफई, इटावा को छोड़कर सरकारी क्षेत्र के 13 व निजी क्षेत्र के 16 मेडिकल काॅलेज बड़े शहरों में स्थापित हैं। राज्य में लगभग 50 जिले ऐसे हैं, जहां मेडिकल काॅलेज नहीं हैं। प्रदेश की जनता को पर्याप्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अधिक से अधिक जिलों में मेडिकल काॅलेजों की स्थापना की महती आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को यह भी अवगत कराया है कि प्रदेश सरकार भारत सरकार की योजना के तहत मेडिकल काॅलेजों की स्थापना हेतु अत्यन्त इच्छुक है। इसके लिए बस्ती, फिरोजाबाद, बहराइच और फैजाबाद के जिला चिकित्सालय चिन्हित किए गए, जिन्हें मेडिकल कॉलेज की स्थापना हेतु पात्र पाया गया।
पत्र में श्री यादव ने उल्लिखित किया है कि प्रदेश सरकार योजना के प्राविधानों के अनुरूप राज्यांश उपलब्ध कराने के लिए सहमत हैं।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से इन जनपदों को स्वास्थ्य मंत्रालय की नए खोले जाने वाले मेडिकल कॉलेज की योजना के तहत सम्मिलित किए जाने का अनुरोध करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया कि राज्य सरकार मेडिकल काउन्सिल ऑफ इण्डिया के मानकों के अनुरूप इन स्थानों पर भूमि की उपलब्धता भी सुनिश्चित करेगी।

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