मुख्यमंत्री ने उद्यमियों को आवंटन पत्र प्रदान किए

  • राज्य सरकार की नीतियाों से प्रभावित होकर उद्यमी प्रदेश में उद्योग स्थापना के लिए आ रहे हैं: मुख्यमंत्री
 
  • मुख्यमंत्री की उपस्थिति में निवेशकों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए

  • इकाईयों के माध्यम से 15,765 करोड़ रुपए का निवेश होगा तथा 29,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे
उद्यमियों को आवंटन पत्र सौंपते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
उद्यमियों को आवंटन पत्र सौंपते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि समाजवादी सरकार राज्य को विकास के रास्ते पर ले जाने का कार्य कर रही है। सरकार के प्रयासों के फलस्वरूप माहौल में बदलाव आया है। राज्य सरकार ने अलग-अलग क्षेत्रों के लिए नवीन नीतियां बनाकर उन्हें लागू किया, जिनसे प्रभावित होकर उद्यमी प्रदेश में उद्योग स्थापना के लिए आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री लखनऊ में आज प्रदेश के औद्योगीकरण के प्रोत्साहन हेतु वृहद परियोजनाओं के निवेशकों के साथ समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) के निष्पादन तथा आवंटन पत्र के वितरण के सम्बन्ध में अपने सरकारी आवास पर उ0प्र0 राज्य औद्योगिक विकास निगम (यू.पी.एस.आई.डी.सी.) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उद्योग बन्धु के सिंगल विण्डो क्लियरेंस सिस्टम का शुभारम्भ भी किया। इस प्रणाली में 2 सब पोर्टल-न्यू निवेश मित्र तथा इण्डस्ट्रीयल ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम सम्मिलित हैं।
मुख्यमंत्री की उपस्थिति में यू.पी.एस.आई.डी.सी. तथा टी.एच.डी.सी. इण्डिया लि. एवं जगदीशपुर पेपर मिल के अधिकारियों के बीच क्रमशः तापीय विद्युत संयंत्र तथा पेपर मिल स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन (एम.ओ.यू.) पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री ने 5 औद्योगिक इकाईयों एवं 1 तकनीकी संस्थान की स्थापना के लिए भूमि के आवंटन पत्र उद्यमियों को प्रदान किए।
श्री यादव ने कहा कि समाजवादी सरकार प्रदेश के विकास व जनता की खुशहाली के पक्ष में है। क्षेत्र का भेदभाव किए बगैर राज्य सरकार सम्पूर्ण प्रदेश का संतुलित विकास चाहती है। इसके दृष्टिगत रायबरेली में एम्स तथा होटल प्रबन्धन संस्थान हेतु भूमि उपलब्ध कराई गई। केन्द्र सरकार के मंत्रियों से सम्बन्धित परियोजनाओं के लिए भी राज्य सरकार ने जमीन मुहैया कराई है। अमूल जैसे उद्यम को लेकर कोई राजनीति नहीं किए जाने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि अमूल की स्थापना न तो एक दिन में हुई और न ही इसे किसी एक सरकार ने बनाया।
श्री यादव ने कहा कि उद्योगों की स्थापना और किसानों की खुशहाली से प्रदेश का विकास सम्भव है। उद्योगों के जरिए लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध होता है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के विकास के सम्बन्ध में किए जा रहे कार्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मेट्रो रेल पर काम शुरु किया गया है। धनराशि का इंतजाम किया जा रहा है। आगरा इनर रिंग रोड परियोजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से करने का फैसला लिया है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में अन्य उद्यमी भी प्रदेश में निवेश करेंगे। पराग द्वारा दुग्ध उत्पादकों को वितरित की जाने वाली धनराशि का व्यय वेतन मद में किए जाने पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने प्रकरण की जांच के निर्देश दिए।
राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष नवीन चन्द्र बाजपेई ने कहा कि प्रदेश सरकार की नई नीतियों के माध्यम से राज्य की खुशहाली और औद्योगीकरण का रास्ता प्रशस्त हुआ है। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष के दौरान प्रदेश की वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय वृद्धि दर 5 प्रतिशत थी। कृषि के क्षेत्र में राज्य की वृद्धि दर 2.6 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 1.6 प्रतिशत था। सेवा सेक्टर प्रदेश में 7.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर इसमें 6.6 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई। उन्होंने बताया कि प्रदेश में औद्योगिक सेक्टर की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत से 0.5 प्रतिशत कम रही। ऐसा इसलिए था, क्योंकि विगत कुछ वर्षों में बिगड़ी हुई स्थिति को पटरी पर लाने में वक्त लगा और इसका वर्तमान सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। यह पिछली नीतियों का प्रभाव था।
अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक रंजन ने कहा कि यू.पी.एस.आई.डी.सी. प्रदेश के औद्योगीकरण में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास के लिए पूंजी निवेश को बढ़ा कर औद्योगीकरण किया जाना आवश्यक है। 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान राज्य की औद्योगिक विकास दर 11.2 प्रतिशत रखने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसे हासिल करने के लिए प्रगतिशील नीतियां बनाई गई हैं, जिनके जरिए उद्यमी निवेश के लिए आकर्षित होंगे और प्रदेश का औद्योगिक विकास होगा।
प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास व अधिशासी निदेशक उद्योग बन्धु डा0 सूर्य प्रताप सिंह ने कहा कि नई औद्योगिक नीति से उद्योगपतियों को विश्वास हो गया कि उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य है, जहां औद्योगीकरण की व्यापक सम्भावना मौजूद है। उन्होंने उन इकाईयों के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला, जिनके साथ आज यू.पी.एस.आई.डी.सी. ने एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर किया और जिन्हें आवंटन पत्र प्रदान किए गए। धन्यवाद ज्ञापन यू.पी.एस.आई.डी.सी. के प्रबन्ध निदेशक मनोज सिंह ने किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन, कारागार मंत्री राजेन्द्र चौधरी, पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अम्बिका चौधरी, बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविन्द चौधरी, वस्त्र उद्योग मंत्री शिव कुमार बेरिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी तथा उद्यमीगण उपस्थित थे।
ज्ञातव्य है कि एम.ओ.यू. एवं प्रदान किए गए आवंटन पत्रों के क्रम में स्थापित होने वाली इकाईयों से 15765.70 करोड़ रुपए का निवेश होगा। इनमें से 10,270 करोड़ रुपए का निवेश तापीय विद्युत उत्पादन संयंत्र, 1540.70 करोड़ रुपए सीमेण्ट उत्पादन तथा 3700 करोड़ रुपए कागज उत्पादन में निवेश होगा। इसी प्रकार 140 करोड़ रुपए दुग्ध उत्पादन, 105 करोड़ रुपए मक्का प्रसंस्करण तथा 10 करोड़ रुपए का निवेश प्लास्टिक तकनीकी शैक्षणिक संस्थान में होगा। विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित की जाने वाली इन परियोजनाओं से लगभग 29,000 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
टी.एच.डी.सी. इण्डिया लि. द्वारा खुर्जा में 10,270 करोड़ रुपए की लागत से तापीय विद्युत परियोजना स्थापित करने हेतु यू.पी.एस.आई.डी.सी. द्वारा 1200 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का समझौता सम्पन्न हुआ। इस परियोजना से 1320 मेगावाट विद्युत उत्पादन होगा। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र उतेलवा में हिन्दुस्तान पेपर मिल की सहायक इकाई, जगदीशपुर पेपर मिल्स लि. के पक्ष में भूमि आवंटन हेतु समझौता किया गया। इस इकाई में लगभग 3700 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है।
औद्योगिक क्षेत्र उमरदा, कन्नौज में 30 एकड़ भूमि पर 105 करोड़ रुपए की लागत से मक्का आधारित परियोजना हेतु भूमि का आवंटन पत्र प्रदान किया गया। ए.सी.सी. सीमेण्ट कम्पनी को क्षमता विस्तार हेतु टिकरिया औद्योगिक क्षेत्र, अमेठी में 3 एकड़ भूमि का आवंटन पत्र सौंपा गया। इससे 650 करोड़ रुपए का पूंजी निवेश प्रस्तावित है। श्री सीमेण्ट लि. को सिकन्दराबाद, बुलन्दशहर में 30 एकड़ भूमि का आवंटन पत्र दिया गया। इस इकाई की स्थापना हेतु 400 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। भूरागढ़ औद्योगिक क्षेत्र बांदा में आम्रपाली पावर एण्ड सीमेण्ट द्वारा 490 करोड़ रुपए की लागत से 29.33 एकड़ भूमि पर सीमेण्ट एवं सीमेण्ट क्लींकर ग्राईंडिंग इकाई स्थापित की जाएगी।
औद्योगिक क्षेत्र करखियांव, वाराणसी में 30 एकड़ भूमि पर 140 करोड़ रुपए की लागत से अमूल द्वारा दूध एवं दुग्ध उत्पादों की परियोजना के लिए भूमि का आवंटन पत्र प्रदान किया गया। इनके अलावा सेण्ट्रल इंस्टीट्यूट आफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलाजी (सीपेट) द्वारा 10 करोड़ रुपए के निवेश से प्लास्टिक आधारित तकनीकी शैक्षिक संस्थान की स्थापना हेतु प्लास्टिक सिटी, दिबियापुर औरैया में 5 एकड़ भूमि का आवंटन पत्र प्रदान किया गया।

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