महिलाएं ध्यान दें

सडक़ पर चार-पाँच साल का कोई बच्चा रोता हुआ दिखेगा तो क्या करेंगी आप? शायद ढूँढेंगी कि वो किसका है। तभी अचानक उस बच्चे की जेब में पता लिखी हुई पर्ची मिल जाये तो? बिना देरी के चल देंगी उसे उसके ठिकाने पर पहुँचने। इंसानियत तो यही कहती है और सभी को यही करना भी चाहिए। ऐसा बिलकुल मत कीजिएगा। जी हाँ, आपकी यह इंसानियत आपको बहुत महंगी पड़ सकती है। आपको ऐसा कोई बच्चा मिले तो उसे उसके पते पर नहीं बल्कि पुलिस स्टेशन लेकर जाएँ वरना आप बहुत बड़ी मुसीबत में पड़ सकती हैं। आजकल देश में एक गिरोह सक्रिय है जो इसी प्रकार से अबोध बच्चों और लोगों की भावनाओं को इस्तेमाल कर रहा है। बच्चों की जेब में पड़ा पता या तो किसी बहुत सुनसान जगह का होता है या वहाँ जाने के लिए सुनसान राह से होकर गुजऱना होता है। गिरोह के सदस्यों की नजऱ पूरा समय पहुंचाने वाली पर रहती है और वे मौका मिलते ही लड़कियों का अपहरण कर उन्हें बेच देते हैं। जगह सुनसान होने के कारण महिला इन हथियारबंद लोगों से अपना बचाव नहीं कर पाती और इनके चंगुल में फंस जाती है। इस गिरोह की शाखाएँ पूरे देश में ही नहीं विदेशों तक में फैली हैं। एक बार अपहरण होने के बाद ये लडक़ी को कहाँ ले जाएंगे किसी को पता नहीं चल पाता। एक लापरवाही के बाद सामान्य जीवन में लौटने के सभी रास्ते बंद हो जाते हैं। यह गिरोह अपना शिकार लड़कियों और महिलाओं को ही बनाता है। इनका मुख्य काम मानव तस्करी ही है, फिरौती आदि नहीं। बच्चा किसी पुरुष के हाथ लग जाये तो गिरोह के सदस्य जो दूर से नजऱ रख रहे होते हैं, तुरंत आकर कोई भी बहाना बनाकर बच्चे को वापस ले लेते हैं। मानवता इंसान का गुण है परंतु अपनी सुरक्षा भी धर्म है। आप परमार्थ करते हुए अपना भी ध्यान रखें। बच्चे की अनदेखी करके आगे बढ़ जाने की सलाह तो हम नहीं देंगे पर उसे पुलिस को सौंप दें। सच में खोया हुआ बच्चा होगा तो पुलिस के सहयोग से अपने माता-पिता के पास पहुँच जाएगा, पर यदि किसी की कोई चाल हुई तो आप सुरक्षित रहेंगीं।

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