महाभ्रष्ट नीरा यादव एक बार फिर दोषी सिद्ध, तीन साल की कैद

– उत्तर प्रदेश की प्रमुख सचिव रह चुकी हैं नीरा यादव।

महाभ्रष्ट नीरा यादव

नोएडा प्लॉट आवंटन घोटाले में आज अदालत का निर्णय आ गया। नोएडा प्राधिकरण की पूर्व सीईओ एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव महाभ्रष्ट नीरा यादव और प्राधिकरण के पूर्व डीसीईओ राजीव कुमार को दोषी करार दिया गया है। दोनों भ्रष्टाचारियों को अदालत ने आज तीन साल कैद और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

उत्तर प्रदेश के नोयडा में हुए भूखंड आवंटन घोटाले में अदालत के सामने सोमवार को अभियोजन और बचाव पक्ष में बहस हुई, जिसे सुनने के बाद फैसले की तारीख 20 नवंबर निश्चित की गई थी। महाभ्रष्ट नीरा यादव व यूफ्लैक्स के मालिक अशोक अग्रवाल को वर्ष 2010 में सीबीआई कोर्ट एक अन्य भूखंड आवंटन मामले में दोषी पाए जाने पर चार-चार साल कैद की सजा पहले ही सुना चुकी है। इस प्रकरण में सीबीआई की ओर से कोर्ट में दो चार्ज शीट दायर की गई हैं, जिनमें महाभ्रष्ट नीरा यादव पर नोएडा अथारिटी की सीईओ रहते हुए आईएएस राजीव कुमार और अपनी दोनों बेटियों के नाम नियम विरुद्ध भूखंड आवंटन का आरोप लगाया था। इसी घोटाले में अदालत ने आज दोनों आरोपियों को तीन साल की कैद और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर जिले के गाँव फिरोजपुर की रहने वाली नीरा यादव का चयन भारतीय प्रशानिक सेवा में 1971 बैच में हुआ था। नीरा यादव प्रदेश के अधिकाँश महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुकी हैं। ऊंची राजनैतिक पहुँच के बल पर ही अपार धन अर्जित कर महाभ्रष्ट का खिताब पा चुकी हैं। प्रमुख सचिव के पद पर रहते समय भी तमाम तरह की चर्चाओं में रहीं, पर उन्हें सरकार ने नहीं हटाया, बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप पर सरकार की मजबूरी बन गई।महाभ्रष्ट नीरा यादव सेवा निवृति के बाद भाजपा में भी शामिल हुई, लेकिन मीडिया ने जोरदार ढंग से मामले को उठाया, जिससे वह राजनैतिक पारी नहीं खेल पाईं। इनके पति महेंद्र सिंह यादव भी आईपीएस अधिकारी रहे हैं। उन्होंने राजनैतिक कारणों से त्याग पत्र दे दिया था।

Leave a Reply