‘मजाक इससे ज्यादा क्या होगा, दुरंगे लोग, तिरंगे की बात करते हैं’

  • मुख्यमंत्री ने सैफई महोत्सव में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया
 
  • मुख्यमंत्री ने कवि सम्मेलन में आए कवियों को शॉल ओढ़ाकर एवं प्रतीक चिन्ह् देकर किया सम्मानित 
सैफई महोत्सव में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व नगर विकास मंत्री आज़म खां, साथ में मौजूद सांसद प्रो. रामगोपाल यादव व महोत्सव समिति के अध्यक्ष एवं सांसद धर्मेन्द्र यादव।
सैफई महोत्सव में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व नगर विकास मंत्री आज़म खां, साथ में मौजूद सांसद प्रो. रामगोपाल यादव व महोत्सव समिति के अध्यक्ष एवं सांसद धर्मेन्द्र यादव।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व नगर विकास मंत्री आज़म खां ने सैफई महोत्सव में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। इस अवसर पर सांसद एवं पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव, लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव, सांसद प्रो. रामगोपाल यादव, महोत्सव समिति के अध्यक्ष सांसद धर्मेन्द्र यादव आदि मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कवि सम्मेलन में आए कवियों को शॉल ओढ़ाकर एवं प्रतीक चिन्ह् देकर सम्मानित किया। उन्होंने “नेताजी” मुलायम सिंह यादव के ऊपर लिखित ‘सड़क से संसद तक’ सहित कवि डा. सुनील जोगी, डा. सुमन दुबे एवं ललित कान्त पाण्डेय द्वारा लिखित तीन पुस्तकों का विमोचन किया।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि नगर विकास मंत्री आजम खां ने अपने सम्बोधन में कहा कि जो लोग इस महोत्सव के सम्बन्ध में टिप्पणी करते हैं, वह ये भूल जाते हैं कि सैफई जैसे कार्यक्रम/महोत्सव के द्वारा ऐसे लोगों की जरूरत की चीजें एक स्थान पर सस्ते मूल्य पर मिल जाती हैं, जो लोग पत्थर तोड़ते हैं, सड़क और खेतों पर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम से आपस में मेल-जोल होता है और अपनी संस्कृति को बढ़ावा मिलता है। इस तहजीब को संजोने में नेताजी की मुख्य भूमिका है। उन्होंने कहा कि सैफई महोत्सव पूरे देश में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि नेताजी ने हिन्दी और उर्दू भाषा को सर्वाधिक महत्व दिया है।
काव्य पाठ करते  गोपाल दास नीरज
काव्य पाठ करते गोपाल दास नीरज
कवि सम्मेलन में सुविख्यात कवि गोपाल दास ‘नीरज’, उदय प्रताप, सुरेन्द्र शर्मा, डा. सुनील जोगी, विष्णु सक्सेना, आत्मप्रकाश शुक्ला, डा. सुमन दुबे, कर्नल बी0पी0 सिंह आदि ने काव्य पाठ किया। कवि सम्मेलन का शुभारम्भ डा. सीता सागर ने सरस्वती वन्दना पढ़कर किया। पवन आगरी ने अपने हास्य व्यंग्य से पण्डाल में उपस्थित भारी जनसमूह को हंसने पर मजबूर किया। नीरज जी के सुपुत्र कवि शशांक प्रभाकर ने कहा ‘इस दौर के माहौल की सूरत नहीं देखी जाती, पैसे से गरीबी की शरारत नहीं देखी जाती’। सबा बलरामपुरी ने पढ़ा ‘अब हवा रागिनी सी लगती है- रात सब नमी से लगती है’।

काव्य पाठ करते सुरेन्द्र शर्मा
काव्य पाठ करते सुरेन्द्र शर्मा
डा. अनिल चौबे ने श्रृंगार रस की कविता में कहा ‘कचंन सी काया… मधुमास लगती हो तुम’। कु. जावेद ने पढ़ा कि ‘मजाक इससे ज्यादा क्या होगा… दुरंगे लोग, तिरंगे की बात करते हैं’। आगरा से पधारे रमेश मुस्कान ने पढ़ा-‘करना मुझको माफ मैं प्यार नहीं दे पाऊंगा, मैं अपने जीवन की सरकार नहीं दे पाऊंगा’। अंसार कम्बरी ने कहा ‘मन्दिर में नमाजी हो, मस्जिद में पुजारी, कैसे हो फेर-बदल, ये सोच रहा हूं’। दिनेश बाबरा ने आज के संस्कारों पर कटाक्ष करते हुये पढ़ा ‘अन्तिम संस्कार में राम नाम की जगह फिल्मी गाना गाएगा’।
डा. सीता सागर ने कहा ‘अजनबी राह पर चली आई- अपना सब कुछ छोड़कर’’। मनवीर मधुर ने पढ़ा ‘कीचड़ उसके पास, मेरे पास गुलाल-जिसके पास जो था, उसने दिया उछाल’। नीरज ने पढ़ा ‘हम तो इतने बदनाम हुए जमाने में- सदियां बीत जायेंगी हमें भुलाने में’। डा. सुमन दुबे ने कहा ‘सारी दुनिया की नजर गीत गजल की रानी हूं- जो जीवन को सुन्दर कर दे, मैं वो प्रेम कहानी हूं’। कवियों ने श्रृंगार रस, वीर रस, समाज में फैली कुरीतियों पर व्यंग्य तथा हास्य रस आदि की अलग-अलग रचनाएं सुनाकर लोगों को देर रात तक गुदगुदाया और तालियां बजाने पर मजबूर किया। कार्यक्रम का संचालन कवि उदय प्रताप ने किया।
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