भ्रष्टाचार और काले धन से मुक्त नहीं हैं रामदेव

पुलिस हिरासत में बालकृष्ण

 भ्रष्टाचार और काले धन के विरोध में देश के कोने-कोने में भ्रमण कर कथित आंदोलन चलाने वाले योग गुरू के नाम से बहुचर्चित रामदेव के प्रमुख साथी नेपाली मूल के बालकृष्ण के जेल जाने से जनता के सामने कई बातें साफ हो गयी हैं। एक तो यही कि भ्रष्टाचार और कालेधन के विरोध में जन-समर्थन मांगने वाले रामदेव स्वयं भी भ्रष्टाचार और कालेधन से मुक्त नहीं हैं। रामदेव स्वदेशी और देशभक्ती का राग भी खुल कर और जमकर अलापते देखे जाते हैं, तो बालकृष्ण के जेल जाने से यह भी साफ हो गया कि उनका प्रमुख सहयोगी बालकृष्ण भारतीय नहीं है, साथ ही बालकृष्ण द्वारा फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट हासिल करने की जानकारी रामदेव को होगी ही, ऐसे में उन्होंने उस जानकारी को छुपाये रखा, जो एक अपराध है, जिससे वह देशभक्त भी नहीं कहे जा सकते। अब सवाल उठता है कि जो व्यक्ति भ्रष्टाचार, काला धन, स्वदेशी और देशभक्ती के पैमाने में स्वयं सही नहीं बैठा पा रहा है, तो उसे जनता समर्थन क्यूं दे? रामदेव की कथनी और करनी को देखने से स्पष्ट नजर आ रहा है कि वह यश, कीर्ति, वैभव और सत्ता के लिए कुछ भी कर सकते हैं। लाल कपड़ा धारण कर हिंदू समाज के सम्मानित व्यक्ति बन गये। अपने कथित योग को वेदों से जोड़ कर जनता से भावनात्मक रिश्ता कायम कर लिया। स्वदेशी का नारा देकर देश और दुनियाभर से अपनी दुकानों के द्वारा माल बटोरने लगे और अब भावनात्मक लहर के ही सहारे देश पर राज करने का भी सपना देख रहे हैं, लेकिन लोमड़ी वाली सोच अधिक दिनों तक छुपी नहीं रह सकती। बालकृष्ण की गिरफ्तारी से साफ हो गया है कि उनके आंदोलन राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के साधन मात्र ही हैं, जिसका खुलासा अब जनता के सामने हो चुका है, इसलिए उन्हें अब जनता से अपेक्षित सहयोग कभी नहीं मिलेगा और न ही उन्हें ऐसी अपेक्षा अब करनी चाहिए। आने वाले समय में उनके व्यापार पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। रामदेव को यह बात अच्छी तरह याद रखनी चाहिए कि प्रकृति के नियम के अनुसार जो व्यक्ति जिस गति से उठता है, प्रकृति उसे उसी गति से नीचे भी गिराती है। पिछले कुछ दिनों में उनके द्वारा की गयी हरकतों से साफ है कि जनता से मिल रहे प्रेम को वह पचा नहीं पाये, जबकि स्वयं को वह योग गुरू मानते हैं।

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