बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा दिया जाये: राष्ट्रपति

  • राष्ट्रीय एकता को अक्षुण्ण बनाने के लिए राष्ट्रपति ने किया सभी भाषा-भाषियों का आहवान्
इलाहाबाद में आयोजित निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के 86वें अधिवेशन का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ करते राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
इलाहाबाद में आयोजित निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के 86वें अधिवेशन का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ करते राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सभी भाषी-भाषाओं का आहवान् किया है कि आइये हम सब मिल करके राष्ट्र को सुदृढ़ बनाएं। उन्होंने आज इलाहाबाद में आयोजित निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन के 86वें अधिवेशन के उद्घाटन भाषण में कहा कि मनुष्य की चेतना में ही द्वन्द, हर्ष, विषाद, हताशा, आकर्षण एवं प्रतिकर्षण होता है और उसे साहित्य में व्यक्त किया जाता है। पाठक उसी में खुद को ढूढ़ता है, तब साहित्य व्यक्तिगत न रहकर सार्वजनिक हो जाता है।
श्री मुखर्जी ने कहा कि मनुष्य के विकास के लिए राष्ट्र एवं समाज का कुछ दायित्व होता है। राष्ट्र ही व्यक्ति के विकास के लिए जिम्मेदार होता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य हमेशा अमृत ढूढ़ता है और वह साहित्य से ही प्राप्त होता है। हमारी संस्कृति की मुख्य विशेषता ही है- अनेकता में एकता। बंगला के साहित्यकारों ने कहा है कि भाषा, मत, वेश-भूषा में अलग होते हुए भी इसमें एकता झलकती है। राष्ट्रपति ने कहा कि साहित्य ही मूल भावना है। उन्होंने कहा कि प्रथम बंग साहित्य सम्मेलन 1921 में कानपुर के बंग समाज भवन में हुआ था और बाद में काशी में हुए सम्मेलन में रवीन्द्र नाथ ठाकुर ने भाग लिया था, तब से यह साहित्य सम्मेलन उत्तरोत्तर कई क्षेत्रों में आयोजित किया गया, जिसमें जाने-माने विद्वानों ने भाग लिया।
राष्ट्रपति ने कहा कि वह साहित्यकार तो नहीं हैं, लेकिन साहित्य में उनकी गहरी रुचि है। ‘‘मैं बचपन से ही निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन की खबरें अखबारों में पढ़ता रहता था। बाद में 1980 में जमशेदपुर में पहली बार मैने अधिवेशन का उद्घाटन किया। वहीं से मैं सम्मेलन से सीधे जुड़ गया। पहली बार मैने कहा था कि एक समय आयेगा जब राष्ट्रीय एकता की जिम्मेदारी इस सम्मेलन को लेनी होगी।’’
इस मौके पर प्रदेश के राज्यपाल बी.एल. जोशी ने क्रिसमस की हार्दिक बधाई देते हुए सम्मेलन के आयोजन पर अपने खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि निखिल भारत बंग साहित्य सम्मेलन का शानदार इतिहास रहा है। रवीन्द्र नाथ टैगोर, चिन्तामणि घोष, शरत चन्द्र, सत्येन्द्र नाथ बसु, निहार रंजन राय, देवी प्रसाद चौधरी, प्रफुल्ल चन्द्र राय, जगदीश चन्द्र बसु, प्रमथ चौधरी, जलधर सेन, तारा शंकर, माणिक बंद्योपध्याय जैसे विद्वानों/मनीषियों ने इस सम्मेलन को अलंकृत किया है। उन्होंने कहा कि बंगाल के मनीषियों ने देश और विदेश में मानवता का संदेश दिया है।
प्रदेश के होमगार्ड एवं प्रान्तीय रक्षक दल एवं व्यावसायिक शिक्षा मंत्री ब्रहमा शंकर त्रिपाठी ने राष्ट्रपति, राज्यपाल  सहित सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए कहा कि साहित्य की दुनिया में बांगला साहित्य अनुकरणीय है। बंगाल ने तमाम मूर्धन्य विद्वानों को पैदा किया है इसका इतिहास गवाह है।
आयोजक संस्था की अभ्यर्थना समिति के अध्यक्ष डा. मिलन मुखर्जी ने राष्ट्रपति, राज्यपाल सहित सबका स्वागत किया। मेयर अभिलाषा गुप्ता ने शहर की ओर से राष्ट्रपति का हार्दिक स्वागत एवं अभिनन्दन किया। प्रारम्भ में दीप प्रज्ज्वलित कर के राष्ट्रपति ने सम्मेलन का उद्घाटन किया। सांसद प्रदीप भट्टाचार्य ने राष्ट्रपति को बुके, प्रतीक चिन्ह, सम्मान पत्र, देवी दुर्गा की मूर्ति तथा कई पुस्तकें भी भेंट किया। सम्मेलन में जयंतो घोष, शिवसिंदु मुखोपाध्याय, प्रदीप भट्टाचार्य ने भी संबोधित करते हुए अपने विचार व्यक्त किये। इस मौके पर उ0प्र0 बीज विकास निगम के अध्यक्ष उज्जवल रमण सिंह, विधायक अनुग्रह नारायण सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

बालिकाओं की शिक्षा पर बढ़ावा दिया जाये: राष्ट्रपति

 
भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने संबोधन में प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें स्व0 चिन्तामणि घोष की मूर्ति का अनावरण और अच्छे शैक्षिक वातावरण वाले जगत तारन गल्र्स इन्टर कालेज के नवनिर्मित भवन का अनावरण करने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी इलाहाबाद मे यह दूसरी यात्रा है, उन्होने इलाहाबाद की जनता का इस अवसर पर अभिनन्दन किया। श्री मुखर्जी आज यहाँ इलाहाबाद मे जगत तारन गर्ल्स इन्टर कालेज मे आयोजित अपने दूसरे कार्यक्रम मे स्व0 चिन्तामणि घोष के मूर्ति का अनावरण और विद्यालय के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण करने के पश्चात् आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। राष्ट्रपति श्री मुखर्जी ने कहा कि बालिकाओं की शिक्षा मे यह विद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होने स्व0 बाबू चिन्तामणि घोष का उल्लेख करते हुये कहा कि वे पश्चिम बंगाल के हाबड़ा जिले के निवासी थे, छोटी अवस्था मे उनके पिता का देहावसान हो गया था, परन्तु बाबू घोष ने मेहनत एवं लगन के बल पर इंडियन प्रेस की स्थापना की और हिन्दी भाषा में सरस्वती पत्रिका का प्रकाशन किया। स्व0 घोष का हिन्दी भाषा एवं साहित्य विकास मे उल्लेखनीय योगदान रहा है, जिनकी प्रंशसा की जानी चाहिये।
राष्ट्रपति श्री मुखर्जी ने शिक्षा के महत्व पर बल देते हुये कहा कि शिक्षा विकास का सशक्त माध्यम है, उन्होने पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 पंडि़त जवाहर लाल नेहरू के एक कथन का उल्लेख करते हुय कहा कि यदि भारत को महान बनाना है तो उसकी शुरुआत शिक्षण संस्थाओं से होती है। श्री मुखर्जी ने कहा कि हमें आधुनिक भारत के निर्माण के लिये युवाओं के बौद्धिक और सामाजिक प्रतिभा को बढा़ना होगा। युवा हमारे राष्ट्र के निर्माता है, इन्हें विकास का माध्यम बनाना होगा। संविधान मे निःशुल्क शिक्षा की आवश्यकता पहले से ही अनुभव की जा रही थी। इसी को साकार रूप देने के लिये वर्ष 2002 मे शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा प्रदान किया गया, जिसमें 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने की व्यवस्था की गयी। उन्होने यह भी कहा कि इस उम्र तक के प्रत्येक बच्चों को स्कूल भेजा जाना चाहिये। उन्होने यह भी कहा कि विद्यालयों मे शिक्षा दिया जाना ही पर्याप्त नही है, बल्कि शिक्षा के स्तर को भी ऊंचा करना आवश्यक है।
श्री मुखर्जी ने बालिकाओं की शिक्षा पर जोर देते हुये कहा कि शिक्षा मे बालिकाओं की बराबर की भागीदारी होनी चाहिये। उन्होने कहा कि बच्चों को न केवल पढ़ाई, बल्कि समाज सेवा के लिये भी शिक्षित किया जाना चाहिये। उन्होने चिन्ता व्यक्त की कि देश मे महिला साक्षरता की दर पुरूष साक्षरता से कम है, इसमें वृद्धि के लिये पूरा प्रयास हो। हमारे समाज मे महिलाओं के प्रति सम्मान बढ़ाने के साथ ही साथ ऐसा वातावरण सृजित किया जाये जिसमे महिलाओं के अवसर एवं प्रतिभा को आगे बढ़ने का मौका मिले और राष्ट्र निर्माण मे वे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।
राष्ट्रपति ने आगे कहा कि हमारे देश के युवा बुद्धि में किसी से कम नहीं है, आवश्यकता उनमें समर्पण भाव पैदा करने की है। उन्होंने कहा कि किसी विद्यालय का महत्व विद्यार्थियों की संख्या से नहीं आंका जाना चाहिए बल्कि शिक्षण संस्थाओं में मानवीय सम्मान एवं सामाजिक संस्कार वाले बच्चे तैयार किये जायें, जो भारत निर्माण में अपना योगदान दे सकें। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं से कहा कि देश को महान बनाने में कठोर परिश्रम करने वाले बच्चों को शिक्षित किया जाये। उन्होंने आवाहन किया कि आइये हम सब इस लक्ष्य एवं उद्देश्य के साथ आगे बढ़े। इस अवसर पर प्रदेश के राज्यपाल बी.एल. जोशी, प्रदेश के मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ब्रहमा शंकर त्रिपाठी एवं आयोजक डा. मिलन मुखर्जी सहित जिला प्रशासन के अधिकारीगण उपस्थित थे।
महामहिम राष्ट्रपति के आज दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर वायुसेना के हेलीकाप्टर द्वारा बमरौली एयरपोर्ट पहुंचने पर उनका स्वागत महामहिम राज्यपाल उ0प्र0 बी.एल. जोशी, मुख्यमंत्री उ0प्र0 के प्रतिनिधि के रुप में प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, प्रान्तीय रक्षक दल एवं होमगार्डस् मंत्री ब्रहमा शंकर त्रिपाठी, इलाहाबाद नगर निगम की मेयर महानगर की प्रथम महिला अभिलाषा गुप्ता के अलावा इलाहाबाद मण्डल के आयुक्त कुमार कमलेश, जिलाधिकारी राज शेखर एवं सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्पगुच्छ के साथ उनका स्वागत किया।
बमरौली हवाई अड्डे पर अपरान्ह 3.40 बजे महामहिम राष्ट्रपति को विदाई देने के लिए राज्यपाल उ0प्र0 बी.एल. जोशी, मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रुप में व्यावसायिक शिक्षा, होमगार्डस् मंत्री ब्रहमा शंकर त्रिपाठी, मेयर अभिलाषा गुप्ता सहित मण्डलीय आयुक्त कुमार कमलेश, जिलाधिकारी राज शेखर सहित सेना के अधिकारी गण उपस्थित थे। राष्ट्रपति बमरौली एयरपोर्ट से वायुसेना के हेलीकाप्टर द्वारा बाबतपुर हवाई अड्डा वाराणसी के लिए प्रस्थान किये जहां से वायुसेना के विमान से नई दिल्ली के लिए प्रस्थान कर गये।

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