बदायूं महोत्सव में मनमानी हुई तो भुगतेगा सत्ता पक्ष

– फरवरी में आयोजित होगा चार दिनी बदायूं महोत्सव

बदायूं महोत्सव की तैयारियों से संबंधित बैठक लेते डीएम जीएस प्रियदर्शी
बदायूं महोत्सव की तैयारियों से संबंधित बैठक लेते डीएम जीएस प्रियदर्शी

– व्यक्ति विशेष को ब्रांड बनाने का जरिया बनता रहा है महोत्सव

– अवैध उगाही पर भी लगानी होगी रोक, डीएम ने बनाई कमेटियां 

बदायूं महोत्सव एक परिवार को ब्रांड बनाने का जरिया बनता रहा है, इसलिए बदायूं महोत्सव से अधिकाँश आम लोगों का मोह भंग हो चुका है। इस वर्ष महोत्सव का आयोजन होना निश्चित हो चुका है। पूर्व की तरह ही आज जिलाधिकारी जीएस प्रियदर्शी की अध्यक्षता में हुई बैठक में तिथियाँ घोषित कर दी गईं। 16 से 19 फरवरी तक आयोजित होने वाले बदायूं महोत्सव में कवि सम्मलेन, मुशायरा, स्टार नाइट, लोकनृत्य, शास्त्रीय गायन, वादन, लोक गीत, सुगम गीत, ग़ज़ल, भजन और ड्रेस, मेंहदी व रंगोली प्रतियोगिताओं के साथ हस्त कलाकृतियों की विभिन्न प्रदर्शनियां लगाने का ऐलान किया गया है, ऐसा प्रस्ताव पहले भी बनता रहा है, लेकिन पूरा आयोजन एक व्यक्ति के ही हाथ में दे दिया जाता है, जिससे महोत्सव व्यक्ति विशेष को ख्याति दिलाने का जरिया बन कर रह जाता है।

बसपा शासन में मनमानी और व्यक्तिगत स्वार्थ पूर्ति होने की संभावनाएं कम ही रहती हैं, जिससे सपा शासन आते ही बदायूं महोत्सव का आयोजन करने को कुछ ख़ास लोग उतावले हो उठते हैं। आर्थिक मामलों में भी जमकर मनमानी होती रही है। व्यापारियों, धनाढ्य वर्ग और राजनेताओं के साथ अधिकारियों-कर्मचारियों से भी उगाही होती रही है, जिसका लेखा-जोखा रख पाना नामुमकिन ही है, साथ ही मंच पर कौन रहेगा, कौन बोलेगा, कौन कवि होंगे, कौन कलाकार होंगे, किसको कौन सा पुरस्कार दिया जायेगा, वीवीआईपी गैलरी में कौन बैठेगा?, इसी तरह के अन्य तमाम निर्णय सामूहिक रूप से नहीं लिए जाते एवं एक ख़ास व्यक्ति व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति के उद्देश्य से मुख्य अतिथि और पुरस्कारों का चयन कर लेता है। सूत्र का कहना है कि इस बार सपा के वरिष्ठ नेताओं को महोत्सव में ख़ास अहमियत देकर एक व्यक्ति दर्जा राज्यमंत्री बनने का सपना देख रहा है, वहीं राजनैतिक जानकारों का कहना है कि महोत्सव राजनीति की दिशा भी तय करता है और पूर्व की भांति महोत्सव में इस बार भी मनमानी व भ्रष्टाचार का बोलबाला रहा, तो सत्ताधारी दल को सीधा नुकसान होगा। हालांकि सूत्रों का यह भी कहना है कि इस बार डीएम जीएस प्रियदर्शी के कारण मनमानी और भ्रष्टाचार कायम नहीं रह पायेगा। डीएम विभिन्न कमेटियां गठित करने के साथ प्रत्येक कमेटी में एक सरकारी प्रतिनिधि रखने वाले हैं, लेकिन फिर वही सवाल कि अनधिकृत रूप से उगाये जाने वाले चंदे पर आखिर कैसे रोक लग पायेगी?

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