प्रदेश सरकार किसानों के हितों के प्रति संवेदनशील: सीएम

  • मुख्यमंत्री ने उ0प्र0 वाटर सेक्टर रीस्ट्रक्चरिंग परियोजना के द्वितीय चरण का शुभारम्भ किया
 
  • यह परियोजना राज्य को खुशहाली की ओर ले जाएगी: मुख्यमंत्री
 
 
उत्तर प्रदेश वॉटर सेक्टर रीस्ट्रक्चरिंग परियोजना के द्वितीय चरण का शुभारंभ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव
उत्तर प्रदेश वॉटर सेक्टर रीस्ट्रक्चरिंग परियोजना के द्वितीय चरण का शुभारंभ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी सरकार ने राज्य को ठोस विकास की राह पर ले जाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों के प्रति संवेदनशील है। पूरे देश में उत्तर प्रदेश इकलौता ऐसा राज्य है, जहां किसानों को नहरों व सरकारी नलकूप से मुफ्त सिंचाई की सुविधा प्रदान की जा रही है।
मुख्यमंत्री आज लखनऊ में अपने सरकारी आवास पर उत्तर प्रदेश वॉटर सेक्टर रीस्ट्रक्चरिंग परियोजना के द्वितीय चरण का शुभारम्भ करने के बाद अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर परियोजना का विधिवत शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना राज्य को खुशहाली की ओर ले जाएगी। उन्होंने कहा कि देश व प्रदेश की खुशहाली के लिए किसान की खुशहाली आवश्यक है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में कृषि के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कृषि उपज में यदि थोड़ी भी अड़चन आती है, तो देश के सकल घरेलू उत्पाद (जी0डी0पी0) के आंकड़े बदलने लगते हैं।
श्री यादव ने उम्मीद जतायी कि इस परियोजना के पूरा होने पर बड़े पैमाने पर किसानों को लाभ मिलेगा और असिंचित क्षेत्रों में सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध होगा। उन्होंने देश व दुनिया में गरीबी मिटाने व पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए विश्व बैंक के प्रयासों की सराहना की। एक वर्ष की कम अवधि में परियोजना को अनुमोदित किए जाने के लिए विश्व बैंक के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उन्होंने यह आशा भी व्यक्त की कि प्रदेश सरकार की अन्य परियोजनाओं में भी विश्व बैंक इसी प्रकार सहयोग प्रदान करेगा।
मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग की उपलब्धियों की सराहना करते हुए इसके लिए सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विभाग के कार्यों को बेहतर बनाने व अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा कराने के लिए सिंचाई मंत्री के प्रयास प्रशंसनीय हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने अपने सम्बोधन में कहा कि समाजवादी सरकार ने लम्बित सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता पर पूरा करने का फैसला लिया। इसके तहत डेढ़ वर्ष की अवधि में बाण सागर परियोजना को पूरा किया गया। यह परियोजना वर्ष 1973 में प्रारम्भ हुई थी। इस परियोजना के क्रियान्वयन से इलाहाबाद व मिर्जापुर जनपदों के किसान लाभान्वित हो रहे हैं। इसी प्रकार सरयू परियोजना भी एक अरसे से लम्बित चल रही है, जिसे राज्य सरकार पूरा करा रही है। उन्होंने कहा कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र के अधूरे बांध व नहरों को पूरा कराने का कार्य भी प्रारम्भ किया गया है।
सिंचाई मंत्री ने कहा कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र में सिंचाई की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कार्य किया जा रहा है। लम्बित परियोजनाओं को पूरा करने के लिए गम्भीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं के पूरा हो जाने पर वहां के किसानों को सिंचाई की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। अगले तीन वर्षों में लगभग 4468 करोड़ रुपए व्यय कर 2,25,584 हेक्टेयर सिंचन भूमि की वृद्धि होगी।
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी ने कहा कि समय के साथ पानी की हमारी जरूरतें बढ़ रही हैं। कृषि, उद्योग व घरेलू उपयोग हेतु जल की खपत में बढ़ोत्तरी हुई है। इसलिए जल व उसकी आवश्यकता में समन्वय स्थापित करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि उ0प्र0 वाॅटर सेक्टर रीस्ट्रक्चरिंग परियोजना के द्वितीय चरण की लागत 3090 करोड़ रुपए है। परियोजना हेतु विश्व बैंक द्वारा 24 अक्टूबर, 2013 को हस्ताक्षर किए गए थे।
परियोजना के लाभ की जानकारी देते हुए श्री उस्मानी ने बताया कि इस परियोजना के फलस्वरूप 4700 क्यूसेक अतिरिक्त जल प्राप्त होगा, जिससे निचली गंगा नहर प्रणाली की टेल पर स्थित सभी नहर प्रणालियों की जल की कमी की समस्या दूर हो सकेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने सिंचाई सेक्टर के परिव्यय को 12वीं पंचवर्षीय योजना में दोगुना से अधिक कर दिया। 11वीं पंचवर्षीय योजना में यह परिव्यय 16,338 करोड़ रुपए था, जिसे 12वीं पंचवर्षीय योजना में बढ़ाकर 37,923 करोड़ रुपए कर दिया गया है।
मुख्य सचिव ने कहा कि नहरों की सिल्ट सफाई वर्ष में दो बार, फसल से पूर्व कराई जा रही है। सिंचाई सम्बन्धी वृहद् कार्य टर्न-की आधार पर कराने से पारदर्शिता व गुणवत्ता में वृद्धि हुई है और इसके अच्छे नतीजे प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा लखनऊ में अति आधुनिक कमाण्ड सेण्टर स्थापित किया गया है, जिससे पानी के सम्बन्ध में उपयोगी जानकारी मिलेगी।
विश्व बैंक के कन्ट्री डायरेक्टर ओनो रूहूल ने अपने सम्बोधन में कहा कि इस परियोजना से कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी और गरीबी को दूर करने में मदद भी मिलेगी। यह परियोजना किसानों के सशक्तिकरण में प्रभावी भूमिका निभाएगी तथा जल सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास की असीम सम्भावनाएं हैं। श्री रूहूल के सम्बोधन की विशेषता यह भी थी कि उन्होंने अपनी बात हिन्दी में रखी, जिसकी मुख्यमंत्री ने भरपूर सराहना की।
इस मौके पर विश्व बैंक के टास्क टीम लीडर विन्सटन यू ने कहा कि यह परियोजना प्रदेश के किसानों की मदद का एक नवीन प्रयास है। उन्होंने कहा कि परियोजना के माध्यम से प्रदेश के सिंचाई एवं कृषि सेक्टर लाभान्वित होंगे।
प्रमुख सचिव सिंचाई दीपक सिंघल ने स्वागत सम्बोधन में बताया कि परियोजना का उद्देश्य कृषि विविधिकरण एवं उत्पादकता को बढ़ाना है। इस परियोजना के पूरा हो जाने से प्रदेश की खेती की दशा एवं दिशा में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि 3090 करोड़ रुपए अर्थात् 515 मिलियन डॉलर की परियोजना की रूपरेखा तैयार करने तथा इसे विश्व बैंक से अनुमोदित कराने तथा उसके साथ करार करने में मात्र एक वर्ष का समय लिया गया, जो पूरे देश में एक रिकार्ड है।
प्रमुख सचिव सिंचाई द्वितीय एवं अध्यक्ष पैक्ट सुरेश चन्द्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर परियोजना के सम्बन्ध में एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन, कृषि मंत्री आनन्द सिंह, कारागार मंत्री राजेन्द्र चौधरी, खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री कैलाश यादव, कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक रंजन, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राकेश गर्ग सहित सम्बन्धित जनपदों के जिलाधिकारी, कृषक व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
ज्ञातव्य है कि विश्व बैंक सहायतित इस परियोजना में प्रदेश के 16 जनपदों को चयनित किया गया, जो विभिन्न नहर प्रणालियों के टेल भाग में पड़ते हैं। यह जनपद हैं-एटा, इटावा, फिरोजाबाद, फर्रूखाबाद, कासगंज, मैनपुरी, कन्नौज, औरैया, कानपुर देहात, कानपुर नगर, फतेहपुर, कौशाम्बी, अमेठी, रायबरेली, बाराबंकी तथा ललितपुर। इन जनपदों की नहरों, नालों आदि की क्षमता को पुनर्स्थापित किया जाएगा।

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