प्रतिबंधित समय में विज्ञापन भी नहीं छाप सकते

पेड न्यूज प्रकरण की जानकारी देते पूर्व विधायक योगेन्द्र कुमार गर्ग 'कुन्नू बाबू'
पेड न्यूज प्रकरण की जानकारी देते पूर्व विधायक योगेन्द्र कुमार गर्ग ‘कुन्नू बाबू’

चुनाव से अड़तालीस घंटे पूर्व प्रचार पर लगने वाला प्रतिबंध अखबार और टीवी की ख़बरों व विज्ञापन पर भी अक्षरशः लागू होता है, इस बारे में कुन्नू बाबू की शिकायत पर चुनाव आयोग द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किये जा चुके हैं।

बाहुबलि और धनबलि के रूप में कुख्यात धर्मपाल सिंह यादव उर्फ डीपी यादव की पत्नी उमलेश यादव को पेड न्यूज का दोषी सिद्ध होने पर भारत निर्वाचन आयोग उत्तर प्रदेश की विधान सभा की सदस्यता से बर्खास्त करने के साथ ही भारतीय जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत तीन वर्ष तक, उनके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा चुका है, इसी प्रकरण में यह बात भी सिद्ध हो चुकी है कि अखबार और टीवी में अड़तालीस घंटों के दौरान प्रचार संबंधी ख़बरों व विज्ञापन को भी नहीं प्रकाशित किया जाना चाहिए।

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में पहली बार भारत निर्वाचन आयोग ने पेड न्यूज के आरोप में योगेन्द्र कुमार गर्ग उर्फ कुन्नू बाबू की शिकायत पर उमलेश यादव की उत्तर प्रदेश विधान सभा से सदस्यता बर्खास्त की थी। कुन्नू बाबू ने धन के बल पर मीडिया और पंपलेट के सहारे दुष्प्रचार कर आम मतदाताओं में भ्रम पैदा करने का आरोप लगाते हुये भारतीय प्रेस परिषद और भारत निर्वाचन आयोग में वाद दायर कर उमलेश यादव को अयोग्य करार देने का निवेदन किया था, जिसे स्वीकार ही नहीं किया गया, बल्कि आरोप सिद्ध भी हो गये। पीसीआई ने 31 मार्च 2010 को उनके पक्ष में आदेश जारी किया, इसी तरह भारत निर्वाचन आयोग ने 20 अक्टूबर 2011 को उमलेश यादव को अयोग्य करार देते हुये तीन वर्ष तक, उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी।

उत्तर प्रदेश के साथ पंजाब और हरियाणा में शराब माफिया के साथ बाहुबलि और धनबलि के रूप में कुख्यात डीपी यादव की उमलेश यादव पत्नी हैं। डीपी ने वर्ष 2007 के चुनाव में उमलेश यादव को बिसौली क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा और इस चुनाव में पानी की तरह पैसा बहाया। उमलेश यादव स्वयं में बेहद शालीन और मृदुभाषी महिला हैं, उनसे मिल चुके लोग उनका सम्मान करते हैं, लेकिन माफिया डीपी यादव की पत्नी होने के चलते वह विवादों में आ गईं।

कुन्नू बाबू ने बताया कि उनकी शिकायत में यह प्रमुख बिंदु था कि प्रतिबंधित अड़तालीस घंटों के दौरान भी अखबारों में प्रचार की खबरें प्रकाशित की गईं, जिस पर चुनाव आयोग स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। चुनाव से अड़तालीस घंटे पूर्व लगने वाला प्रतिबंध अखबार और टीवी पर भी लागू होता है, ऐसे में कोई प्रचार करे, तो लोग उसकी शिकायत कर सकते हैं।

संबंधित खबरें पढ़ने के क्लिक करें लिंक

उच्चतम न्यायालय की शरण में गईं उमलेश यादव

Leave a Reply