परिवार वाद की राजनीति के साथ तेलंगाना अस्तित्व में आया

मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करते के चंद्रशेखर राव
मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करते के चंद्रशेखर राव

29वें राज्य के रूप में तेलंगाना आज विधिवत अस्तित्व में आ गया। तेलंगाना के निर्माण के लिए राजनैतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ युवाओं ने कड़ा संघर्ष किया है। तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) प्रमुख के चंद्रशेखर राव ने आंध्र प्रदेश से अलग हुए इस नए राज्य के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल ईएसएल नरसिम्हन ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। नरसिम्हन को नए राज्य के पहले राज्यपाल के रूप में शपथ आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कल्याण ज्योति सेनगुप्ता ने दिलाई।

उधर 13 मंत्रियों के मंत्रीमंडल में मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव के बेटे केटी रामाराव और भतीजे टी हरीश राव को भी मंत्री बनाया गया है, जो इस ख़ुशी के क्षण पर एक दुखद घटना ही कही जा सकती है, क्योंकि राज्य के निर्माण की प्रक्रिया का श्रीगणेश ही परिवारवाद की राजनीति से हो रहा है। इस परिवारवाद के परिणाम सकारात्मक आने मुश्किल ही हैं। कहीं ऐसा न हो कि संघर्ष करने वाले युवा नयी सरकार और परिवारवाद की इस राजनीति से तेलंगाना के युवाओं का भविष्य अँधेरे में चला जाये।

नए राज्य के अस्तित्व में आने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि – ‘भारत को नया राज्य मिला। हम देश के 29वें सूबे के रूप में तेलंगाना का स्वागत करते हैं। आने वाले वर्षो में तेलंगाना हमारी विकास यात्रा को ताकत प्रदान करेगा। केंद्र इस नए राज्य की पुरजोर मदद करेगा।’

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