परवीन ने बीमा राशि मिलने में भी अटकाया रोड़ा

– शहीद जियाउल हक के माता-पिता को मिलने वाली थी रकम

परवीन आज़ाद
परवीन आज़ाद

जिला प्रतापगढ़ के कुंडा में शहीद हुए डीएसपी जियाउल हक के परिवार में वह सब हो रहा है, जिसकी लोग कल्पना तक नहीं कर सकते। अब बीमे की रकम को लेकर विवाद शुरू हो गया है। बीमे में माता-पिता के नामिनी होने के बावजूद शहीद की पत्नी परवीन आज़ाद ने रोड़ा अटका दिया है, जिससे बुजुर्ग माता-पिता बेहद दुखी हैं, वहीं शहीद की माँ की हालत खराब बताई जा रही है।

जियाउल हक की घटना में कुंडा के पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया का नाम आने के बाद से घटना राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रही है, लेकिन दुख की बात यह है शहीद के आश्रित नौकरी और पैसे को लेकर पहले दिन से ही लड़ रहे हैं, तभी सरकार को भाई और पत्नी को नौकरी देनी पड़ी, साथ ही सहायता राशि भी दो जगह दी गई, जिसको लेकर पत्नी की आलोचना भी हो रही है, पर पत्नी की ओर से आज भी विवाद जारी है।

अब बीमे की रकम को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। देवरिया के मूल निवासी शहीद जियाउल हक ने वर्ष 2009 में 3 लाख 20 हजार व नौ लाख रुपये का बीमा कराया था। नामिनी के रूप में एक बीमे में मां हाजरा और दूसरे बीमे में पिता शमशुल हक का नाम दर्ज है। 27 जून को इस बीमे के धन का भुगतान होना था, लेकिन 25 जून को ही शहीद की पत्‍‌नी परवीन आज़ाद ने आपत्ति दायर कर दी, जिससे बीमा की रकम देने पर फिलहाल रोक लग गई है। परवीन की ओर से कोर्ट का नोटिस मिलने के बाद से शहीद के पिता शमशुल हक सहित पूरा परिवार दुखी है, साथ ही बताया जाता है कि शहीद की माँ हाज़रा की हालत ठीक नहीं है, वहीं सूत्रों का कहना है कि चालीसवें में जाने के बाद से परवीन शहीद के गांव नहीं गईं हैं और शहीद के माता-पिता से भी बात नहीं की है। उधर अब तक की जांच में राजा भैया की घटना में संलिप्तता प्रकाश में नहीं आई है, जबकि सुर्खियां और सहायता राजा भैया का नाम आने से मिली थी।

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