पति पर लांछन लगाने पर अदालत सख्त

पति के चरित्र पर अंगुली उठाने पर बांबे हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए क्रूरता की श्रेणी में रखा एवं तलाक के पर्याप्त आधार भी बताया। न्यायमूर्ति एआर जोशी और एएम खानविल्कर की खंडपीठ ने 21 जून को आदेश दिया कि हम फैमिली कोर्ट के विवाह-विच्छेद के आदेश को बनाये रखने पर सहमत हैं। पत्नी द्वारा पति पर लगाए गए आरोप, कू्ररता की श्रेणी में आते हैं, इसलिए तलाक की डिक्री दी जाती है। इस बीच हाई कोर्ट ने उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें फैमिली कोर्ट ने महिला व उसकी बेटी को गुजारा भत्ता एवं अलग आवास देने की याचिका को अस्वीकार कर दिया था। अदालत ने कहा कि यह उचित नहीं था और इसे ठीक से नहीं निपटाया गया। हाई कोर्ट ने महिला व उसकी बेटी को फैमिली कोर्ट के समक्ष नये सिरे से गुजारा भत्त और अलग आवास देने वाली याचिका को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
पति को लिखे पत्र और फैमिली कोर्ट के समक्ष मौखिक साक्ष्यों और वाद-विवाद के दौरान महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पति के अपनी बहनों से नाजायज संबंध हैं। खंडपीठ ने कहा कि पत्नी ने 11 मई 2००6 को पति को लिखे पत्र में कहा, मुझे आप और आपकी बहनों के बीच नाजायज संबंध होने के संकेत दिखे हैं। ऐसे में हमारी राय में फैमिली कोर्ट द्वारा पारित डिक्री को क्रूरता के आधार पर वैध ठहराया जाना चाहिए। न्यायाधीशों ने कहा कि हमें इस फैसले में आरोप को बार-बार कहने से बचना चाहिए। उल्लेख करने के लिए इतना ही पर्याप्त है कि यह गंभीर और उपेक्षा करने वाली टिप्पणी है।

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