नाराज सपा ने फिर किया मोहन सिंह के कथन का खंडन

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मोहन सिंह के शनिवार के कथन का पार्टी ने आज लखनऊ में लिखित बयान जारी कर खंडन कर दिया। उन्होंने कहा था कि रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को मंत्री बनाये जाने पर अखिलेश यादव को आपत्ति थी, लेकिन पार्टी के दबाव में बनाना पड़ा। इस कथन पर पार्टी नाराज दिखाई दे रही है, तभी आज रविवार को प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने लिखित बयान में कहा कि मंत्रिमंडल के सदस्यों का चयन मुख्यमंत्री के विवेक पर होता है, जो अखिलेश यादव ने बिना किसी दबाव के किया। मोहन सिंह ने यह भी कहा था कि अखिलेश यादव में अनुभव की कमी है और वह गलतियों से सीख रहे हैं,  साथ ही पिछले दिनों वापस लिए फैसलों से सरकार की फजीहत हुई है, इस पर पार्टी की ओर से कहा गया कि सरकार की किसी तरह की किरकिरी नहीं हुई, जिन निर्णयों पर अखिलेश यादव को जनसामान्य की असहमति दिखी, उसे वापस लेकर यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में उनकी गहरी आस्था है।

अखिलेश में अनुभव की कमी के मुद्दे पर राजेन्द्र चौधरी ने दावा किया कि अखिलेश यादव राजनीति में नए नहीं हैं। उनकी राजनीतिक परिपक्वता का प्रदर्शन कई मौकों पर हो चुका है। सपा प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री को अनुभवी व्यक्ति सिद्ध करने के लिए राजनीतिक यात्रा का उल्लेख किया, जिसके अनुसार वह कन्नौज से 1999 में पहली बार सांसद बने और न्नौज की जनता ने उन्हें पुनः दो बार चुना, साथ ही सपा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत किया और चुनाव पूर्व क्रांति रथ यात्रा से प्रदेश में घूम कर प्रचंड बहुमत दिलाया। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि विधानमंडल सत्र में उन्होंने पूरी सक्रियता दिखाई, विधान सभा की कार्यवाही में हिस्सा लेते हुये अपने संसदीय कौशल की भी छाप छोड़ी। मुख्यमंत्री ने वित्तमंत्री के रूप में बजट में कोई नया कर लगाए बिना ही सपा के चुनाव घोषणा पत्र में किए गए वायदों को पूरा करने की दिशा में कदम आगे बड़ा दिये। यहाँ यह बताना भी जरूरी है कि विधान सभा चुनाव के दौरान बाहुबली डीपी यादव के मुद्दे पर बयान देकर मोहन सिंह ने पार्टी की नाराजगी को झेला था और अब एक बार फिर उनकी फजीहत हो गई है।

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