नरेंद्र मोदी के दबाव में राहुल गांधी को बनाया उपाध्यक्ष

नरेंद्र मोदी
नरेंद्र मोदी

अखबार और टीवी के साथ सोशल साइट्स और मोबाइल भी अब मीडिया का ही काम कर रहे हैं। संचार क्रान्ति के चलते मीडिया ने अपनी स्थिति इतनी मजबूत कर ली है कि मीडिया को नज़रंदाज़ कर पाना अब नामुमकिन ही है। चुनाव की बात करें, तो चुनाव में हार-जीत अब मीडिया वार भी प्रभावित करती है और मीडिया वार की बात करें, तो देश में इस समय राहुल गाँधी और नरेंद्र मोदी ही ऐसे व्यक्ति हैं, जो मीडिया वार में एक-दूसरे पर भारी नज़र आते हैं।

कांग्रेस को पसंद न करने वाले भी यह बात स्वीकार कर चुके हैं कि नेहरू-गाँधी खानदान का देश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान है। अधिकाँश लोग इस खानदान को विशेष मानते हैं और विशेष परिवार वाला ही सम्मान देते हैं। कांग्रेस सत्ता में न हो, तो भी इस परिवार के सम्मान में कोई कमी नहीं आती। आम जनता के साथ देश के बड़े नेता भी इस परिवार को विशिष्ट श्रेणी में ही रखते हैं। इस परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने वाले नेता अँगुलियों पर गिनने लायक भी नहीं हैं, इसीलिए इस परिवार को विशेष स्थान देने के लिए मीडिया भी मजबूर है। शक्ति और जनता जिसके साथ है, उसे भला कौन अनदेखा कर सकता है? यही वजह है कि अनुभव और दायित्व न होने के बाद भी राहुल गांधी के मुंह से निकलने वाले शब्द राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खबर बनते रहे हैं। आने वाले लोकसभा चुनाव में जनता कांग्रेस को नकारे या पास करे, पर मीडिया राहुल गांधी को नहीं नकार सकता। उनके शब्दों पर भारी पड़ने वाले शब्द भले ही बहुत से नेताओं के तरकश में भरे पड़े हों, पर उनके शब्दों को मीडिया राहुल गांधी की तुलना में कभी तवज्जो नहीं देगा। मीडिया वार में राहुल गांधी की बराबरी करने वाला शख्स समस्त राजनैतिक दलों में नरेंद्र मोदी के अलावा देश भर में कोई नहीं है। मीडिया के लिए राहुल गांधी को महत्व देने का प्रमुख कारण सिर्फ उनका विशिष्ट परिवार में जन्म लेना ही है। अगले चुनाव में वह कांग्रेस की ओर से

राहुल गांधी
राहुल गांधी

प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी होंगे, तो यह दूसरा कारण होगा, लेकिन नरेंद्र मोदी के पास अन्य कई गुण हैं, जिनके बल पर वह राहुल गाँधी को मीडिया वार में मात देने में सक्षम हैं। राहुल गांधी नेहरू-गांधी खानदान में जन्म लेने के कारण लोकप्रिय हैं, वहीँ नरेंद्र मोदी अपने संघर्षमय जीवन और विवादित होने के कारण एक चर्चित चेहरा हैं। भाषण देने की कला में निपुण हैं और गुजरात में लगातार बम्पर जीत दर्ज कराने के कारण वह सिद्ध कुशल राजनीतिज्ञ भी हैं। ऐसे ही अन्य तमाम कारण हैं, जिनसे कांग्रेस को वोट न देने वाले राहुल गांधी को और भाजपा को वोट न देने वाले नरेंद्र मोदी को देखना/सुनना और पढ़ना पसंद करते हैं। नरेंद्र मोदी के प्रति भाजपा कार्यकर्ताओं की दिवानगी के साथ भाजपा के सामने मोदी को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी बनाने की एक मजबूरी मीडिया वार भी है। भाजपा के पास प्रधानमन्त्री बनाने लायक व्यक्तियों की भले ही लंबी सूची हो, पर मीडिया वार में राहुल गांधी का सामना करने वाला भाजपा में एक भी व्यक्ति नहीं है। राहुल गांधी दिल्ली में बोलें और नरेंद्र मोदी कन्या कुमारी से लेकर कश्मीर तक कहीं भी बोलें, राहुल गांधी पर हर जगह भारी पड़ेंगे। हालांकि विवादित बना कर कांग्रेस ने ही नरेंद्र मोदी को यह कद दिया है, जो अब नेहरू-गांधी खानदान पर ही भारी पड़ने वाला है। नरेंद्र मोदी को भाजपा में मिले दायित्व के दबाव में ही कांग्रेस ने राहुल गांधी को उपाध्यक्ष का दायित्व सौंपा है, जिससे राहुल गांधी का कद वास्तव में घटा है, क्योंकि राहुल गांधी को युवराज लिखने वाला मीडिया अब सिर्फ उपाध्यक्ष ही लिखेगा। हालांकि इससे पहले उन पर महासचिव का दायित्व था, लेकिन उसे आम जनता और मीडिया ने यही समझा कि राहुल गांधी को भविष्य में कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की तैयारी के क्रम में महासचिव का दायित्व देकर उनका कद बढ़ाया जा रहा है। अब उपाध्यक्ष का दायित्व मिलने से मीडिया की नज़र में राहुल गांधी का कद वास्तव में घटा है, जो मीडिया वार में नरेंद्र मोदी की पहली जीत भी कही जा सकती है। राहुल गांधी युवराज के रूप में नंबर विहीन थे और अब उन्हें पार्टी में नंबर दो नेता कहा जा रहा है, जो राहुल गांधी के कद घटने का ही परिचायक है। 

Leave a Reply