नन्द के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की

 

इस बार श्री कृष्ण जन्माष्टमी दो दिन पड़ रही है। 9 अगस्त को स्मार्त तिथि है तो 10 को वैष्णव। भारत के लगभग हर हिस्से में यह एक बड़ा पर्व है जिसे बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। भगवान विष्णु के अवतार कृष्ण ने आततायी कंस का वध कर मथुरा को राक्षसी राज से मुक्त किया। वे परम योगी थे। वे ऐसे एकमात्र अवतार हैं जो पूर्ण सोलह कलाओं से युक्त हैं। उनके आकर्षण से कोई नहीं बच पाया। जन्माष्टमी के दिन कृष्ण जन्म से लेकर कंस वध तक की कथा पढ़ने का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत भी अवश्य करना चाहिए। स्कन्दपुराण के मतानुसार जो व्यक्ति जानकर भी कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को नहीं करता, वह मनुष्य अगले जन्म में जंगल में सर्प और व्याघ्र होता है। भविष्यपुराण का वचन है- श्रावण मास के शुक्ल पक्ष में कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को जो मनुष्य नहीं करता, वह क्रूर राक्षस होता है। जन्माष्टमी को अन्न और नमक का त्याग कर केवल फल और दूध ही ग्रहण करें।

व्रत विधि – उपवास की पूर्व रात्रि को हल्का भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें। उपवास के दिन प्रातःकाल स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत्त हो जाएँ। पश्चात सूर्य, सोम, यम, काल, संधि, भूत, पवन, दिक्‌पति, भूमि, आकाश, खेचर, अमर और ब्रह्मादि को नमस्कार कर पूर्व या उत्तर मुख बैठें। इसके बाद जल, फल, कुश और गंध लेकर संकल्प करें-

ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्धये
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्रतमहं करिष्ये॥

अब मध्याह्न के समय काले तिलों के जल से स्नान कर देवकीजी के लिए ‘सूतिकागृह’ नियत करें। तत्पश्चात भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। मूर्ति में बालक श्रीकृष्ण को स्तनपान कराती हुई देवकी हों और लक्ष्मीजी उनके चरण स्पर्श किए हों अथवा ऐसे भाव हो। इसके बाद विधि-विधान से पूजन करें। पूजन में देवकी, वसुदेव, बलदेव, नंद, यशोदा और लक्ष्मी इन सबका नाम क्रमशः निर्दिष्ट करना चाहिए।

फिर निम्न मंत्र से पुष्पांजलि अर्पण करें- ‘प्रणमे देव जननी त्वया जातस्तु वामनः।
वसुदेवात तथा कृष्णो नमस्तुभ्यं नमो नमः।
सुपुत्रार्घ्यं प्रदत्तं में गृहाणेमं नमोऽस्तु ते।’

अंत में प्रसाद वितरण कर भजन-कीर्तन करते हुए रतजगा करें।

व्रत फल – जो व्यक्ति जन्माष्टमी के व्रत को करता है, वह ऐश्वर्य और मुक्ति को प्राप्त करता है। आयु, कीर्ति, यश, लाभ, पुत्र व पौत्र को प्राप्त कर इसी जन्म में सभी प्रकार के सुखों को भोग कर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है। जो मनुष्य भक्तिभाव से श्रीकृष्ण की कथा को सुनते हैं, उनके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। वे उत्तम गति को प्राप्त करते हैं।

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