दुर्गा और उनके पति छोड़ सकते हैं उत्तर प्रदेश

दुर्गा शक्ति नागपाल के विरुद्ध षड्यंत्र रचने वाला सपा नेता नरेंद्र भाटी
दुर्गा शक्ति नागपाल के विरुद्ध षड्यंत्र रचने वाला सपा नेता नरेंद्र भाटी
निलंबित आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल
निलंबित आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल

राजनीति और विवादों से व्यथित निलंबित आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल और उनके आईएएस पति अखिलेश उत्तर प्रदेश छोड़ सकते हैं। ऐसा हुआ, तो प्रदेश के बाकी ईमानदार अफसरों का भी मनोबल गिरना स्वाभाविक है।

उल्लेखनीय है कि ग्रेटर नोएडा के कादलपुर गांव में एक मस्जिद की अवैध दीवार गिराने का दोषी मानते हुए एसडीएम के पद पर तैनात आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल को प्रदेश सरकार ने 27 जुलाई को निलंबित कर दिया था, जिसको लेकर देश भर में बवाल मचा हुआ है। दुर्गा के निलंबन को लेकर प्रदेश सरकार की हर कोई आलोचना कर रहा है, लेकिन सूत्रों कहना है कि निलंबन और निलंबन के बाद हुई राजनीति से दुर्गा और उनके आईएएस पति अखिलेश व्यथित हैं।

इससे पहले भी दुर्गा पंजाब कैडर की अधिकारी थीं। वर्ष 2010 में चुने गए 875 आईएएस उम्मीदवारों की सूची में दुर्गा शक्ति नागपाल ने बीसवीं रैंक हासिल की थी और उन्हें पंजाब कैडर मिला था। दुर्गा के पति अखिलेश भी 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और यूपी में ही तैनात हैं, इसलिए दुर्गा ने अपना कैडर परिवर्तित करा लिया था। प्रथम तैनाती के रूप में उन्हें 15 सितंबर 2012 को ग्रेटर नोयडा का एसडीएम पद मिला था, इस क्षेत्र में अवैध खनन का धंधा बड़े पैमाने पर होता रहा है, जिस पर दुर्गा की नज़र जानी स्वाभाविक थी, लेकिन उन्होंने समझौते करने की जगह माफियाओं के विरुद्ध कार्रवाई शुरू कर दी। कुछ ही दिनों में उन्होंने 50 से ज्यादा रेत से भरे डंपरों को जब्त कर रेत माफिया के बीच खौफ पैदा कर दिया था. इसी दौरान अवैध खनन के मामले में ओमेंद्र खारी नाम के एक शख्स पर भी उन्होने शिकंजा कसा था, जिससे माफियाओं के आका तक काँप गये। यहाँ के सपा नेता और माफियाओं के अघोषित संरक्षक नरेंद्र भाटी ने कादलपुर के मस्जिद विवाद को हवा देकर दुर्गा का निलंबन करा दिया, पर निलंबन सरकार के गले की फांस बन गया, जिससे सत्ताधीश उनके प्रति और कड़क होते जा रहे हैं, जिससे दुर्गा और उनके पति की आने वाले दिनों में मुश्किलें और बढ़ सकती हैं, इसीलिए सूत्रों का कहना है कि दोनों ही लोग उत्तर प्रदेश छोड़ सकते हैं।

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