दु:खद: राम जी के धाम गए हनुमान जी

महाबली दारा सिंह नहीं रहे

ज़िंदगी में कभी न हारने वाले महाबली दारा सिंह ने मौत को भी हराने की बहुत कोशिश की, पर मौत से लड़ते हुए  गुरुवार सुबह 7.30 बजे दुनिया से चल बसे। मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती दारा सिंह कई दिनों से वेंटिलेटर पर थे।  उनके खून में ऑक्सीजन की भारी कमी थी।

रामायण में हनुमान बनकर लक्ष्मण के लिए जड़ी बूटी लाने वाले दारा सिंह के लिए डॉक्टर कोई जड़ी-बूटी नहीं खोज पाये। उन्हें जो बीमारी थी उसे क्रॉनिक इन्फ्लेमेटरी डेमीलीटेटिंग पॉलीन्यूरोपैथी के नाम से जाना जाता है। कुश्ती में अपनी बादशाहत कायम करने के बाद दारा सिंह ने  1962 में हिंदी फिल्मों से अभिनय की दुनिया में कदम रखा। पहलवानी से मिली कीर्ति के बाद रामायण सीरियल में हनुमान के किरदार ने दारा सिंह को हिंदुस्तान के दिलों में बसा दिया था।  गुरुवार सुबह साढ़े सात बजे ‘रुस्तम ए हिंद’ ने आखिरी सांस ली। ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद जब दवाओं ने असर करना बंद कर दिया तो दारा को बुधवार रात उनके परिजन घर ले गए। परिजनों और बेटे बिंदू दारा सिंह की इच्छा थी कि दारा सिंह घर पर ही अंतिम सास लें।  दारा सिंह भी अंतिम वक्त में अपने घर पर रहना चाह रहे थे।

दारा सिंह अपने जमाने के विश्व प्रसिद्ध फ्रीस्टाइल पहलवान थे। उन्होंने 1959 में विश्व चैंपियन जार्ज गारडियांको को कोलकाता में कामनवेल्थ खेलों के दौरान हराकर विश्व चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। कोई विशेष और खर्चीली ट्रेनिंग लिए बिना कुश्ती में अपना लोहा मनवाने वाले दारा सिंह ने अपने घर से ही कुश्ती की शुरूआत की थी।  उन्होंने 50 के दशक में फिल्म जगत में कदम रखा था। ‘किंग कांग’ और ‘फौलाद’ जैसी फिल्मों ने  उन्हें खास पहचान दिलाई। उनकी अंतिम फिल्म इम्तियाज अली की ‘जब वी मेट’ थी। इस फिल्म में दारा सिंह ने करीना कपूर के दादा का किरदार निभाया था।

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