दुःखद: भ्रष्ट तंत्र से तंग आकर वीडीओ ने की आत्महत्या

  • सांसद धर्मेन्द्र यादव के नाम छोड़ा चार पेज का सुसाइड नोट
मृतक के घर पर मौजूद गमगीन लोग
मृतक के घर पर मौजूद गमगीन लोग

जनपद बदायूं में दातागंज कोतवाली क्षेत्र के गाँव पापड़ निवासी समरेर ब्लॉक में तैनात ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत प्रदीप कुमार ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों की अवैध वसूली से तंग आकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है, जिससे परिजनों ने अन्येष्टि करने से मना कर दिया है। मृतक ने सांसद धर्मेन्द्र यादव के नाम चार पेज का सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें उसने आत्महत्या करने के कारणों का सनसनीखेज खुलासा किया है।

बदायूं के सांसद धर्मेन्द्र यादव के नाम हस्तलिखित चार पेज के सुसाइड नोट में मृतक ने लिखा है कि, जिला के बाबू खंड विकास अधिकारी व प्रमुख की मिलीभगत से उगाही करने पर अड़े हैं, जिससे समाजवादी पार्टी की छवि खराब हो रही है। उसने अपनी मजबूरी के बारे में लिखा है कि, हर काम पैसे से ही होता है और उसके पास पैसे नहीं थे, इसीलिए वह सांसद को फैक्स नहीं कर पाया। मृतक ने लिखा है कि, उसे यहाँ तक परेशान किया गया कि, ब्लॉक में नौकरी करनी है, तो पैसे लाकर दे, वरना निलंबित करा देंगे। मृतक प्रदीप कुमार अपने पिता रामसिंह की जगह 6 जून 2013 को नियुक्त किया गया था। मृतक के पिता रामसिंह की सेवाकाल में ही 4 जनवरी 2013 को मृत्यु हो गयी थी। मृतक ने लिखा है कि, पिता की बीमारी के चलते पहले से ही काफी क़र्ज़ हो गया था और उनकी मृत्यु के बाद अपनी नौकरी, क्लेम और माँ की पेंशन आदि के लिए भी बाबुओं को क़र्ज़ लेकर रिश्वत दी थी। उसने लिखा है कि, आंवला की मीटिंग में सांसद के पीए से सबसे अधिक शोषण करने वाले प्रभारी एडीओ गौस मोहम्मद की शिकायत की, तो गौस मोहम्मद ने चेतावनी दी कि, यहाँ से चला जा, वरना निलंबित करा देंगे। आगे लिखा है कि, उसने आंवला लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद व सपा प्रत्याशी कुंवर सर्वराज सिंह से भी शिकायत की, पर उन्होंने भी मदद नहीं की। उसने सांसद धर्मेन्द्र यादव के साथ अपने भाई संजीव, ओमवीर सिंह यादव, सपा नेता बलवीर सिंह यादव व सपा जिलाध्यक्ष बनवारी सिंह यादव से अपने परिवार की मदद करने की गुहार लगाई है। पत्र में यह भी लिखा है कि, वह सांसद धर्मेन्द्र यादव की कोठी पर मिलने भी गया था, पर भीड़ अधिक होने के कारण मुलाक़ात नहीं हो पायी। उसने छोटे भाई के बारे में लिखा है, कि बेटे आकाश, का ख्याल रखना। भाई संजीव, पत्नी का ध्यान रखना, वह मुझे बहुत समझती थी, शालिनी की शादी कर देना और अपने पत्नी बच्चों को लिखा है कि परिवार के साथ मिलकर चलना।

सुसाइड नोट के अनुसार मृतक मुख्य रूप से खंड विकास अधिकारी आरपी सिंह और एडीओ पंचायत गौस मोहम्मद से अत्यधिक परेशान था, क्योंकि यही लोग उस पर अवैध वसूली का दबाव बनाये हुए थे। बताया जाता है, कि गौस मोहम्मद की राजनैतिक पकड़ बहुत मजबूत है और वह इस ब्लॉक में लगभग सोलह वर्षों से तैनात है, साथ ही ग्राम पंचायत विकास अधिकारी है और सेटिंग के चलते प्रभारी एडीओ ग्राम पंचायत बना हुआ है।

आत्महत्या करने वाले को लोग कमज़ोर और कायर कहते हैं, पर प्रदीप ने अपना दर्द बयान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अधिकारियों से लेकर नेताओं तक, वह हर किसी के दरवाज़े पर गया, पर उससे शिकायतकर्ता की तरह नहीं, बल्कि भिखारी की तरह व्यवहार किया गया। भ्रष्ट तंत्र की तह तक जाने को राजा गुप्तचर रखते थे, खुद भेस बदलकर घूमते थे, पर आज एक आदमी खुद चलकर आकर बताना चाहता है और उसकी कोई सुनता तक नहीं।

बताना आवश्यक है कि प्रदीप इंटर पास है और पिता की मृत्यु के बाद इस पद पर नियुक्त किया गया था, लेकिन अभी तक उसे वेतन नहीं मिला और न ही उसकी माँ को पेंशन मिलती है, जिससे भुखमरी की समस्या होना स्वाभाविक ही है। मृतक के बारे में बताया जाता है कि वह बेहद सरल और सहज भाव का इंसान था। सभी से बड़े अच्छे से मिलता था, लेकिन इस भ्रष्ट तंत्र से हार गया।

उधर मृतक के भाई गौरव ने बीडीओ आरपी सिंह और गौस मोहम्मद के नाम नामजद तहरीर दी है, पर अभी तक पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया है। आक्रोशित परिजनों ने शव घर पर ही रख लिया है, उनका कहना है कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, तब तक अंत्येष्टि नहीं करेंगे। मृतक अनुसूचित वर्ग की धोबी जाति का है, इसलिए सरकारी तंत्र दुःखद घटना के बाद भी सक्रीय नज़र नहीं आ रहा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कुछ स्पष्ट नहीं आया है, इसलिए बिसरा सुरक्षित कर लिया गया है।

Leave a Reply