दर्द निवारक भी होती है लिखने वाली पेंसिल

रामानुज असावा
रामानुज असावा

महाराष्ट्र निवासी रामानुज असावा कंपनी सेक्रेटरी हैं, लेकिन वह आंकड़ों से नहीं खेलते, पेंसिल से खेलते हैं और खेलते-खेलते वे एक नयी उपचार विधा के जनक बन गए हैं, जिसका नाम है पेंसिल थेरेपी। जी हाँ, उनकी यह थेरेपी सिर्फ कॉरपोरेट्स के सिर का ही दर्द दूर नहीं करती, बल्कि खास के साथ आम लोगों के भी तरह-तरह के दर्द उड़न छू कर देती है। लिखने-पढ़ने के शौकीन और सोशल साइट्स पर बेहद सक्रीय रहने वाले रामानुज असावा की थेरेपी को समझ कर कोई भी लाभ उठा सकता है

क्या है पेंसिल थेरेपी ?

पेंसिल थेरेपी शारीरिक दर्द और मानसिक तनाव के निवारण की एक सरल पद्धति है। इस थेरेपी से एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर, सु-जोक, रेफ़्लेक्सोलोजी, इत्यादि के लाभ मिलते हैं और इसे सीखना व करना भी अत्यंत आसान है। जिनके शरीर में दर्द या तनाव हो उन्हें यह थेरेपी करते समय अपनी उंगली पर दर्द का अनुभव होगा। थेरेपी करने से उन्हें दर्द और तनाव से राहत मिलेगी। यह थेरेपी बहुत ही आसान है, इसे कोई भी सीख और कर सकता है, इसे सीखने और करने के लिए पढ़ा लिखा होना आवश्यक नहीं है। किस दर्द में कौन सी जगह कितना दबाव देना है, बस यह याद रखने की आवश्यकता है।

पेंसिल थेरेपी करने के क्या लाभ है?

पेंसिल थेरेपी करने से दर्द से पीड़ित व्यक्ति को दर्द में राहत मिलती है और मानसिक तनाव से भी मुक्ति मिलती है। जिस व्यक्ति के शरीर में दर्द न हो उसे स्फूर्ति का एहसास होता है और लगता है मानो नई ऊर्जा का संचार हुआ है। कई प्रकार की बीमारियों में पेंसिल थेरेपी से लाभ लिया जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है।

 पेंसिल थेरेपी कैसे की जाती है?

बेलनाकार पेंसिल को हाथ और पैर की उँगलियों पर अंगूठे से थोड़े से दबाव के साथ घुमाया जाता है। पेंसिल को उँगलियों के चार साइड और चार कोनों पर घुमाया जाता है। नाखूनों पर पेंसिल नहीं घुमाते हैं। नाखून को छोड़कर बाकी सारी उंगली पर पेंसिल घुमाई जाती है।

पेंसिल थेरेपी
पेंसिल थेरेपी

क्या सावधानियां बरतें?

  • गर्भवती महिलाओं को पेंसिल थेरेपी का उपचार नहीं देना चाहिए।
  • यदि कोई महिला मासिक धर्म में हो तो उन्हें पूरी पेंसिल थेरेपी नहीं देना चाहिए। यदि उन्हें कोई दर्द हो तो उस दर्द का उपचार किया जा सकता है। जैसे कि यदि सर दर्द हो या और कोई दर्द हो तो उस दर्द के निवारण के लिए जितना उपचार देना आवश्यक हो उतना उपचार देना चाहिए।
  • कोई दवा चल रही हो तो उसे बिना डॉक्टर की सलाह के बंद नहीं करना चाहिए।
  • पेंसिल थेरेपी करने से पहले यह देख लेना चाहिए कि जिन उँगलियों पर पेंसिल घुमाना है वे उँगलियाँ स्वस्थ है। उँगलियाँ कटी-फटी न हो, उनपर कोई घाव या फोड़ा-फुंसी या चोट न लगी हो, जिन उँगलियों में पहले से ही दर्द हो, उनपर पेंसिल थेरेपी नहीं करनी चाहिए।
  • पेंसिल थेरेपी भोजन के एक घंटा पहले या दो ढाई घंटे बाद करनी चाहिए।

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