तीन लाख में बिक गया एक आईएएस अधिकारी

– वन विभाग के भ्रष्ट अफसरों को रिश्वत लेकर बचाया 

– पिछले दिनों भ्रष्ट को बनाया हापुड़ का जिलाधिकारी

आदेश नंबर-एक
आदेश नंबर-एक

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जनपद महोबा के कई तत्कालीन भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की है, लेकिन वन विभाग के ही भ्रष्ट अधिकारियों को छोड़ने वाले एक आईएएस अधिकारी को उन्होंने पुरस्कृत करते हुए डीएम बना दिया, जबकि भ्रष्टाचारियों को बचाने वाले आईएएस अधिकारी को भी निलंबित करना चाहिए।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जनपद महोबा के तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी आरआर गौतम, उपप्रभागीय वनाधिकारी संजीव कुमार शर्मा और वन क्षेत्राधिकारी विमल कुमार जायसवाल को आज निलंबित करने का आदेश दिया है। उक्त तीनों पर वित्तीय अनियमितता के साथ गलत आख्या देने का आरोप सिद्ध हुआ है। वित्तीय वर्ष 2010-11 में महोबा रेंज के ग्राम रतौली वन ब्लाक में कराए गए कार्यों का सत्यापन मुख्य विकास अधिकारी महोबा द्वारा किया गया, जिसमें वित्तीय अनियमितताएं मिलीं। इसके बाद शासन ने मुख्य वन संरक्षक केके झा से जांच कराई, तो कार्यों की भ्रामक आख्या दी गई। महोबा के ग्राम रतौली के अतिरिक्त अन्य 16 स्थानों पर कराए गए कार्यों की माप पुस्तिका में अधूरी प्रविष्टियों के साथ अन्य कई गंभीर कमियां पाई गईं, जिसके आधार पर उक्त तीनों अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि बदायूं में तैनात रहे सीडीओ आईएएस अधिकारी सूर्यपाल गंगवार वन विभाग के अधिकारियों को बचा चुके हैं, फिर भी उन्हें मुख्यमंत्री ने हापुड़ का डीएम बना दिया, जबकि सूर्यपाल गंगवार के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई होना चाहिए।

बदायूं में मुख्य विकास अधिकारी के पद पर रहते हुए आईएएस अधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने 27 जुलाई 2012 को मुरादाबाद-फर्रुखाबाद पर मनरेगा के अंतर्गत हुए वृक्षारोपण कार्यों का निरीक्षण किया। 30 जुलाई 2012 को उन्होंने पत्रांक संख्या-3914 के तहत एक पत्र जारी किया, जिसमें घोटाला सिद्ध करते हुए जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक को संबंधित अधिकारियों से वसूली करने और उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया गया, इस आदेश पर कार्रवाई होती, उससे पहले 30 जुलाई 2012 को ही पत्रांक संख्या- 3915 के तहत दूसरा आदेश जारी कर दिया, जिसमें भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के साथ वसूली करने का आदेश तो था, पर मुकदमा लिखाने का आदेश नहीं था।

आईएएस अधिकारी सूर्यपाल गंगवार द्वारा कुछ ही देर बाद दूसरा आदेश जारी करने से साफ़ है कि वह भ्रष्टाचारियों से मिल चुके थे, ऐसे में उनके विरुद्ध भी

आदेश नंबर-दो
आदेश नंबर-दो

कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन मुख्यमंत्री ने कार्रवाई करने की जगह उन्हें हापुड़ का जिलाधिकारी बना कर एक तरह से पुरस्कृत ही किया है।

तीन लाख में बिक गये सूर्यपाल गंगवार

 बदायूं के निवर्तमान सीडीओ और वर्तमान में हापुड़ के डीएम सूर्यपाल गंगवार

बदायूं के निवर्तमान सीडीओ और वर्तमान में हापुड़ के डीएम सूर्यपाल गंगवार

आईएएस अधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने सीडीओ के पद पर रहते हुए इस तरह के आदेश क्यूं किये, इसका खुलासा तो जांच के बाद ही हो सकेगा, पर सूत्रों का कहना है कि भ्रष्टाचारियों ने एक मध्यस्थ को तीन लाख रूपये दिए थे। रिश्वत मध्यस्थ ही हजम कर गया होता, तो साफ़ है कि कुछ ही देर बाद आदेश न बदला होता। रिश्वत सूर्यपाल गंगवार तक पहुंची है, तभी आदेश में परिवर्तन कर दिया गया। सूत्रों की बात को सच माना जाए, तो ऐसा भ्रष्ट अधिकारी जिलाधिकारी के रूप में क्या हाल करेगा, खुद ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाये जायेंगे सभी कारनामे

बदायूं में सीडीओ के पद पर रहते हुए सूर्यपाल गंगवार और भी कई कारनामे कर गये हैं। कुछ लोग सभी मामलों को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाने के प्रयास में लगे हुए हैं, ताकि सूर्यपाल गंगवार के कार्यकाल की विधिवत जांच होने के बाद दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई हो सके।

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