तमीजन का शासन कब आयेगा?

बुजुर्ग महिला तमीजन
बुजुर्ग महिला तमीजन

इंदिरा आवास, वृद्धावस्था, विधवा और किसान पेंशन सहित अन्य तमाम योजनाओं का लाभ पाने को भटकते हुए तमाम परेशान लोग राह चलते दिख जायेंगे। जातिवाद, रिश्वत और सिफारिश के बल पर अधिकाँश लोग योजनाओं का लाभ ले भी लेते हैं, लेकिन तमीजन नाम की बुजुर्ग महिला की जाति सिर्फ गरीबी है और उसकी जाति का कोई नेता नहीं है, सो सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाते-लगाते थक चुकी है, उसे मकान और पेंशन भी नहीं चाहिए। उसकी छोटी सी तमन्ना यह है कि शासन को जाने वाली भिखारियों की सूची में उसका भी नाम दर्ज हो जाए।

जनपद बदायूं में कस्बा उझानी के कांशीराम आवास में रहने वाली तमीजन के बेटे-बहू का किसी तरह अचानक देहांत हो गया, तो बूढ़ी तमीजन के कन्धों पर दो से आठ-नौ साल तक की उम्र के चार बच्चों का बोझ आ गिरा। वह अमीर-गरीब, छोटे-बड़े चाहे जिसके सामने हाथ फैला दे, उसे कोई निराश नहीं करता। एक-दो रुपया लोग ख़ुशी-ख़ुशी दे देते हैं। लोगों के सहारे वह खुद के साथ चार बच्चों को किसी तरह पाल रही है। बसपा शासन में उसे घर मिल गया, सो बेहद खुश है। मायावती को दुयाएँ भी देती है। अखिलेश यादव को भी वह दुआएँ दे रही होती, पर उनकी सरकार के अफसर दुआ के आड़े आ रहे हैं। वह कचहरी में घूम-घूम कर अफसरों और बाबुओं से मिल कर यही मांग करती दिखती है कि भिखारियों की सूची में उसका नाम दर्ज कर लिया जाए, पर एक अफसर दूसरे के पास और दूसरा, तीसरे के पास भेज देता है।

लोकतंत्र शब्द सुनने में बड़ा मीठा लगता है और लोकतंत्र के साथ समाजवाद भी जुड़ जाये, तो और भी सुखानुभूति होती है। उत्तर प्रदेश की जनता का यह सौभाग्य ही है, जो उसे लोकतंत्र के साथ समाजवादी शासन भी मिला है, पर तमीजन को सुखानुभूति नहीं हो रही, तो इसमें कोई और क्या कर सकता है?

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