गुवाहाटी प्रकरण: डीजीपी के बयान की निंदा

गुवाहाटी में नाबालिग छात्रा को सरेआम निर्वस्त्र करने वाले दरिंदे

 

असम के गुवाहाटी में शर्मसार कर देने वाली घटना पर केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने नाराजगी जतायी है। गुवाहाटी के व्यस्ततम जीएस रोड पर क्लब मिंट के सामने 8 जुलाई को एक छात्रा को करीब बीस दरिंदों ने सरेआम बाल पकड़कर सड़क पर घसीटा।  इतना नहीं, इस छात्रा के कपड़े भी फाड़े गए, लेकिन मौके पर मौजूद भीड़ में से किसी ने उफ तक नहीं की और सब तमाशा देखते रहे। बाद में पुलिस ने उसे दरिंदों से मुक्त कराया। बीस लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज कर पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना पर शर्मिंदा होने की बजाय वहाँ के डीजीपी ने कहा कि, ‘पुलिस एटीएम मशीन नहीं होती, जिसमें कार्ड की तरह घटना का ब्योरा डाला जाए और मुजरिम हाथ आ जाए।’ उनके इस बयान की महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने कड़ी निंदा की है। उन दरिंदों में से अभी भी केवल चार ही गिरफ्तार हुए हैं जबकि सभी बीस आरोपियों के फोटो प्रकाशित हो चुके हैं। इनमें एक राज्य सरकार की आईटी एजेंसी एमट्रॉन का कर्मचारी अमरज्योति कलिता भी शामिल है जिसे नौकरी से निकाल दिया गया है।

इस घटना ने समाज का असली चेहरा उजागर कर दिया है। घटना होने के बाद उन लड़कों को जमकर कोसने वाले बहुत से लोग हैं परंतु उस समय भीड़ में से कोई एक भी सामने नहीं आया। क्या भीड़ उन बीस लड़कों का मुक़ाबला नहीं कर सकती थी? आज तरह-तरह की बातें की जा रही हैं। कोई उन लड़कों को दरिंदा कह रहा है और कोई लड़की पर उंगली उठा रहा है, पर सोचने वाली बात यह है कि क्या यह लोग हमारे समाज का हिस्सा नहीं हैं? क्या कोई बेटा परिवार के संस्कारों से बाहर जा सकता है? क्या वे तमाशबीन उन दरिंदों से कम दोषी हैं? भीड़ के सामने उस लड़की को बेज़्ज़त करना ही तो उन लड़कों का लक्ष्य था। भीड़ ने उनके इस लक्ष्य में उनका साथ दिया। इस घटना के लिए केवल वे संस्कारहीन लड़के नहीं, बल्कि वे सभी लोग जिम्मेदार हैं जो चुपचाप सब देखते रहे। इस घटना पर गृहमंत्री पी चिदम्बरम द्वारा जताई गयी नाराज़गी ही काफी नहीं है, उन्हें सीधे हस्तक्षेप कर घटना के आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कारवाई भी करानी चाहिए, साथ ही गृहमंत्रालय को गंभीरता से ऐसे प्रबंध भी करने चाहिए जिससे भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृति न हो।

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