गुटखा प्रतिबंधित करने के निर्णय पर अडिग है केंद्र सरकार

पुरुषों को नपुंसक और महिलाओं को बांझ बना सकता है गुटखे का सेवन

 

 

बार-बार कहा जाता है कि गुटखा सेहत के लिए हानिकारक है। यहाँ तक कि इसका खाली पैकेट भी पर्यावरण के लिए जहर का काम करता है। केंद्र सरकार पहले ही इसकी बिक्री को गैरकानूनी घोषित कर चुकी है। अपना निर्णय दोहराते हुए केंद्र सरकार ने एक बार फिर कहा कि, गुटखा की बिक्री देश के सभी हिस्सों में गैरकानूनी है।  उसने राज्य सरकारों से अनुरोध भी किया है कि, इस प्रतिबंध को लगाने वाले केंद्रीय नियम पर अमल करें, साथ ही स्पष्ट भी किया कि इस निर्णय पर पुनर्विचार का या इसे वापस लेने का उसका कोई इरादा नहीं है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार खाद्य सुरक्षा और मानक नियमन 2011 के मुताबिक गुटखा प्रतिबंधित किया जा चुका है।  मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, मध्य प्रदेश, केरल, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों को पत्र लिख कर इस नियम को लागू करने का अनुरोध किया है। केंद्र सरकार के इस अनुरोध के बाद  मध्य प्रदेश, केरल, बिहार और महाराष्ट्र ने इस पर पाबंदी लगाने के लिए सरकारी आदेश जारी भी कर दिये हैं।

कुछ पक्षों की ओर से भ्रम फैलाया जा रहा है लेकिन सरकार इस निर्णय पर अडिग है और दिल्ली हाई कोर्ट में भारत का खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) शपथ पत्र दाखिल कर कह चुका है कि गुटखे को वह प्रतिबंधित उत्पाद मानता है। फिलहाल सरकार का यह निर्णय वापस लेने का कोई इरादा नहीं है। देखते हैं इस निर्णय का क्या असर पड़ता है और कितने राज्य इस पर अमल करने को तैयार होते हैं?

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