गाड़ी पर लाल-नीली बत्ती लगाने का चल रहा है क्रेज

जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक रामरक्षपाल यादव की निजी गाड़ी पर लगी नीली बत्ती
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक रामरक्षपाल यादव की निजी गाड़ी पर लगी नीली बत्ती

गाड़ी के ऊपर लाल-नीली बत्ती लगाने का आज कल क्रेज चल रहा है। बड़ी संख्या में लोग बत्ती पाने को लालायित ही नहीं हैं, बल्कि हर तरह की सेटिंग भी करते नज़र आ रहे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि जिनके प्रयास विफल साबित हो जाते हैं, वे फिर बाजार से खरीद कर अपनी गाड़ी पर बत्ती खुद ही लगा लेते हैं, ऐसे तमाम लोग हैं, लेकिन पुलिस उनके विरुद्ध कार्रवाई करने में असमर्थ नज़र आ रही है।

लालबत्ती को लेकर विधिवत शासनादेश जारी होता है, इसी तरह नीली बत्ती कौन लगा सकता है, यह भी शासन ने निश्चित कर रखा है, लेकिन तमाम लोग शासनादेश के विपरीत गाड़ी पर बत्ती लगाये नज़र आ रहे हैं, ऐसे लोगों में बड़े नेता भी हैं और अफसर भी, इसीलिए पुलिस कार्रवाई करने से बचती रहती है, लेकिन सवाल यह उठता है कि उनकी गाड़ी पर सजी बत्ती के बारे में उन्हें पता ही है कि वह फर्जी है, इसी तरह अफसर भी जानते हैं कि उनके पास शासनादेश के अनुसार बत्ती नहीं है, तो फिर बत्ती किसे दिखाने को लगा रखी है?

आम आदमियों में भी अब ऐसे तमाम जागरूक नागरिक हैं, जिन्हें मीडिया के माध्यम से पता रहता है कि उनके जिले में किस के पास लाल-नीली बत्ती है। इस जानकारी से अनभिज्ञ लोगों की संख्या बहुत कम है, इसलिए फिर सवाल उठता है कि बेहद निचले तबके के लोगों के सामने रौब ग़ालिब करने से मिलता क्या है?

बदायूं जिले में जिला ग्राम्य विकास अभिकरण में परियोजना निदेशक के पद पर तैनात रामरक्षपाल यादव ऐसे ही लोगों में से एक हैं। वह अपनी निजी गाड़ी पर नीली बत्ती लगा कर चलते हैं, लेकिन सच सभी जानते हैं। उनके मातहत भी जानते हैं, सो उनके पीछे उनकी नीली बत्ती को लेकर खूब फजीहत भी करते रहते हैं, पर उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। जिस काम में खुद को अच्छी फीलिंग आये और सामर्थवान होने के बावजूद वो काम न किया जाये, तो फिर सामर्थवान होने का फायदा ही क्या है। उनके बारे में बताया जाता है कि वह प्रो. रामगोपाल यादव के दाहिना हाथ हैं, इसलिए उनसे कोई किसी तरह का सवाल-जवाब नहीं कर सकता। उनकी पत्नी भी जिला विद्यालय निरीक्षक के पद पर बदायूं में ही तैनात हैं।

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