गन्ना कृषकों को लाभकारी मूल्य दिलाने का केंद्र से अनुरोध

  • गन्ना पेरार्इ सत्र शीघ्र प्रारम्भ कराने के उददेश्य से किया गया अनुरोध
गन्ना कृषकों को लाभकारी मूल्य दिलाने का केंद्र से अनुरोध
गन्ना कृषकों को लाभकारी मूल्य दिलाने का केंद्र से अनुरोध
प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश के गन्ना कृषकों को लाभकारी मूल्य दिलवाने तथा चीनी उधोग की सम्पोषकीयता सुनिश्चित करने के उददेश्य से केन्द्र सरकार से ब्याज उपादान योजना, जो वर्ष 2006-07 एवं 2007-08 के लिए लागू की गर्इ थी, उसी प्रकार की योजना वर्ष 2012-13 एवं 2013-14 के लिए लागू करने, देश में चीनी का अत्यधिक भण्डार होने के दृषिटगत चीनी के आयात शुल्क पर देय आयात शुल्क को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का अनुरोध किया है। प्रदेश सरकार ने केन्द्र सरकार से चीनी के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए यातायात अनुदान उपलब्ध कराने तथा चीनी के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए एक्सपोर्ट डयूटी ड्राबैक (1.3 प्रतिशत) को बढ़ाकर 3 प्रतिशत तक करने, जिससे चीनी का निर्यात सम्पोषकीय हो सके, का भी अनुरोध किया है। यह अनुरोध इस आशय से किया गया है, जिससे गन्ना पेरार्इ सत्र शीघ्र प्रारम्भ हो सके।
यह जानकारी देते हुए आज लखनऊ में सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि पेरार्इ सत्र 2013-14 प्रारम्भ हो चुका है और किसानों को गन्ने को काट कर दूसरी फसल की बुवार्इ करनी है, इसलिए चीनी मिलों द्वारा तत्काल पेरार्इ प्रारम्भ करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने भारत सरकार से वर्तमान परिसिथतियों को ध्यान में रखते हुए इस प्रकरण पर शीर्ष प्राथमिकता पर विचारोपरान्त चीनी उधोग को भारत सरकार से अतिशीघ्र सहायता दिलाने का अनुरोध किया है।
ज्ञातव्य है कि उत्तर प्रदेश भारतवर्ष का सर्वाधिक गन्ना क्षेत्रफल तथा गन्ना उत्पादन वाला प्रदेश है। इस राज्य में चीनी उद्योग सबसे महत्वपूर्ण ग्रामीण उद्योग है तथा गन्ना प्रमुख नकदी फसद है, जिससे 32 लाख से अधिक कृषक परिवार तथा 2 लाख से अधिक श्रमिकों के साथ-साथ प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से हजारों लोग जुड़े हैं। प्रदेश में 123 चीनी मिलें कार्यरत हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि पेरार्इ सत्र 2013-14 प्रारम्भ हो चुका है। उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों को गन्ने की अबाध आपूर्ति बनी रहे तथा गन्ना कृषकों को लाभकारी मूल्य दिलाने की दृषिट से राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष राज्य परामर्शित गन्ना मूल्य निर्धारित किया जाता है।
प्रवक्ता ने कहा कि विगत 6 माह में चीनी की कीमतों में कमी के दृषिटगत राज्य सरकार द्वारा चीनी मिलों की सम्पोषकीयता को ध्यान में रखते हुए पेरार्इ सत्र 2013-14 के लिए भी राज्य सरकार द्वारा वही गन्ना मूल्य निर्धारित किया गया है, जो गत पेरार्इ सत्र 2012-13 के लिए निर्धारित किया गया था। यद्यपि कृषकों के द्वारा गन्ना उत्पादन में निवेश की लागत में इस वर्ष गत वर्ष की अपेक्षा वृद्धि हुर्इ है। प्रदेश व भारत सरकार के विभिन्न शोध संस्थानों यथा-उ0प्र0 गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर, सरदार बल्लभ भार्इ पटेल कृषि विश्वविधालय मेरठ, भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ एवं भारतीय गन्ना विकास निदेशालय लखनऊ द्वारा गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष गन्ना उत्पादन लागत औसतन लगभग 22 रुपए प्रति कुन्तल अधिक आंकलित की गर्इ है। फिर भी किसान और चीनी उधोग दोनों के हितों के संतुलन के दृषिटगत राज्य सरकार द्वारा पेरार्इ सत्र 2013-14 में विगत पेरार्इ सत्र की अपेक्षा गन्ना मूल्य में कोर्इ वृद्धि नहीं की गर्इ है।
प्रवक्ता ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें इस गन्ना मूल्य (280 रुपए प्रति कुन्तल सामान्य प्रजाति)  पर भी चीनी मिल संचालन की सिथति में आर्थिक क्षति का पक्ष रख रहीं हैं। पेरार्इ सत्र 2013-14 के लिए उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों द्वारा निरन्तर यह पक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है कि विगत 6 माह से चीनी की कीमतों में अप्रत्याशित कमी के कारण चीनी मिलों का संचालन किया जाना संभव नहीं हो पा रहा है तथा चीनी मिलों द्वारा किसी भी सिथति में 240 रुपए प्रति कुन्तल से अधिक गन्ना मूल्य भुगतान किए जाने की क्षमता नहीं है। इन परिसिथतियों में राज्य सरकार द्वारा अपनी ओर से चीनी मिलों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के उददेश्य से पेरार्इ सत्र 2013-14 के लिए गन्ना क्रय कर में छूट देने का निर्णय लिया गया है। साथ ही शीरा नीति में संशोधन करते हुए शीरे पर नियंत्रण को भी शिथिल किया गया है, जिससे चीनी मिलों को शीरे पर बाजार मूल्य प्राप्त हो सके। चीनी मिलों द्वारा को-जेनरेशन से उपलब्ध करार्इ गर्इ विद्युत् का भी तत्परता से भुगतान कराया गया है।
प्रवक्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश के चीनी उद्योग ने विगत 6 माह से चीनी की दरों में अप्रत्याशित कमी होने के परिप्रेक्ष्य में यह भी अनुरोध किया है कि उन्हें भारत सरकार से इस वर्ष के लिए सहायता उपलब्घ करायी जाए ताकि वह गन्ना कृषकों को गत पेरार्इ सत्र 2012-13 का बकाया गन्ना मूल्य तथा वर्तमान पेरार्इ सत्र 2013-14 के गन्ना मूल्य का भुगतान तत्परता से कर सकें।

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