कप्तान की घुट्टी से मिले साहस के तत्काल बाद पकड़े बैल

नूरपुर पिनौनी स्थित में बैठक में बोलते एसएसपी अतुल सक्सेना व साथ में मौजूद एसपी (ग्रामीण) और सीओ बिसौली
नूरपुर पिनौनी स्थित में बैठक में बोलते एसएसपी अतुल सक्सेना व साथ में मौजूद एसपी (ग्रामीण) और सीओ बिसौली

बदायूं के नवागत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अतुल सक्सेना तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई करने का विश्वास दिला कर कुछ ही दूर निकले थे और नूरपुर पिनौनी के लोगों ने बाइक से पीछा कर बैलों से भरी कई गाड़ियाँ पकड़ लीं। कप्तान बैठक के दौरान नंबर भी दे आये थे, सो किसी ने उन्हें भी फोन कर दिया, जिससे आगे से घेरने दलबल के साथ सीओ बिसौली भी पहुँच गये, तो खुद को घिरा पाकर घबराए चालक-परिचालक गाड़ियों को छोड़ कर भाग गये।

नूरपुर पिनौनी में हुए बवाल के बाद एसएसपी दलबीर सिंह यादव को शासन ने हटा दिया था। उनकी जगह तैनात किये गये शामली के एसपी अतुल सक्सेना ने अगले ही दिन आकर कार्यभार ग्रहण कर लिया था। वह आज नूरपुर पिनौनी गये और लोगों के साथ बैठक की। उन्होंने तस्करों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने का विश्वास दिलाया, साथ ही बताया कि उन्होंने तस्करी पूर्ण रूप से बंद करने के लिए हेल्पलाइन (9454402957) शुरू की है, जिस पर कोई भी किसी भी समय तस्करी के संबंध में सूचना दे सकता है। सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने लोगों से पुलिस का सहयोग करने की भी अपेक्षा की। इसके बाद वह मुख्यालय लौटने के लिए निकल लिए।

बताया जाता है कि सहसवान दिशा की ओर से आ रहीं बैलों से भरी कई गाड़ियों पर बस स्टैंड के किनारे टहल रहे लोगों की नज़र पड़ गई। कई युवाओं ने बाइक से पीछा करते हुए कप्तान द्वारा दिए गये नंबर पर फोन भी कर दिया। युवाओं और पुलिस ने मिल कर गाड़ियों को गाँव लश्करपुर ओईया में आकर रोक लिया। चालक-परिचालक गाड़ियाँ छोड़ कर भाग गये। किसी तरह पकड़ कर जानकारी ली गई, तो पता चला कि सभी बैलों को सहसवान कोतवाली पुलिस ने पकड़ा था, जो गौशाला भेजे जा रहे थे। यही जानकारी कप्तान अतुल सक्सेना को दी गई, तो उन्होंने गौशाला भेजने की जगह ग्रामीणों के सुपुर्द करने के निर्देश दे दिए। सूत्रों का यह भी कहना है कि गोपनीय बैठक में कप्तान ने समस्त थानाध्यक्षों और दरोगाओं को कड़े निर्देश दे दिए हैं कि वह तस्करी का एक भी रुपया न लें, वरना अंजाम बुरा होगा, वहीं तस्करों पर शिकंजा कसने से कप्तान की तारीफ़ होना शुरू हो गई है, जिससे देखने वाली ख़ास बात यह रहेगी कि कप्तान की यह कार्यप्रणाली कब तक बरकरार रहेगी?

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