औरों को मारने के लिए ही है आपकी झाड़ू

औरों को मारने के लिए ही है आपकी झाड़ू
औरों को मारने के लिए ही है आपकी झाड़ू

आम आदमी पार्टी के विरुद्ध हुए स्टिंग ऑपरेशन को लेकर भूचाल मचा हुआ है। स्टिंग ऑपरेशन के पक्ष में अधिकांश लोग खड़े नज़र आ रहे हैं। हालांकि, स्टिंग ऑपरेशन करने वाले अनुरंजन झा पर भी आरोप लगाये जा रहे हैं, लेकिन वे सब आरोप फिलहाल, स्वाभाविक ही नज़र आ रहे हैं, क्योंकि आम आदमी पार्टी के नेताओं के पास स्टिंग ऑपरेशन पर सवाल उठाने और अनुरंजन झा पर आरोप लगाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। इसलिए इस विषय को छोड़ कर इस मुद्दे पर बात करते हैं कि, अधिकाँश लोग स्टिंग ऑपरेशन के पक्ष में क्यूं खड़े नज़र आ रहे हैं?

असलियत में आम आदमी पार्टी की स्थापना का आधार जाति, धर्म से ऊपर उठ कर स्वच्छ राजनैतिक विकल्प बताया गया था, साथ ही पहले से मौजूद सभी दलों से खुद को भिन्न बताया गया, इसीलिए छोटी से छोटी गलती भी बड़ी है, क्योंकि वह छोटी गलती ही उसे उसी श्रेणी में खड़ा कर देती है, यही कारण है कि, अधिकाँश लोग स्टिंग के पक्ष में खड़े हैं।

स्टिंग ऑपरेशन को गंभीरता से लेने के पीछे भी कई कारण हैं। लोगों के दिमाग में कई बातें जमा हैं, जो स्टिंग ऑपरेशन के चलते ताज़ा हो गई हैं, इसीलिए अधिकाँश लोग स्टिंग ऑपरेशन को सही मानते हुए आम आदमी पार्टी की तीखी आलोचना कर रहे हैं। कुछ घटनायें हाल की ही हैं। तौकीर रज़ा को लेकर आम आदमी पार्टी की जमकर फजीहत हुई थी, जिस पर पार्टी को सफाई देनी पड़ी थी, जबकि इस सवाल का जवाब अब भी बाक़ी है कि, जाति-धर्म से ऊपर उठ कर राजनीति करने का दावा करने वालों को एक विवादित व्यक्ति की शरण में क्यूं जाना पड़ा?

आईएमसी के अध्यक्ष तौकीर रज़ा पर क़ानूनन बरी हो जाने के बाद भी आरोप लगता है कि, बरेली शहर में वर्ष 2008 में हुए दंगों को भड़काने में उनकी अहम भूमिका थी। इस सब के अलावा लेखिका तस्लीमा नसरीन और जॉर्ज बुश के विरुद्ध फतवा जारी करने के कारण तौकीर रजा विवादित रहे हैं और उन्हें कट्टरपंथी माना जाता है, साथ ही जिस समाजवादी पार्टी की अरविंद केजरीवाल आलोचना करते रहे हैं, उसकी सरकार में तौकीर रज़ा दर्जा राज्यमंत्री भी हैं। चुनाव जीतने के लिए भाजपा, कांग्रेस, सपा और बसपा जैसे दल जिस प्रकार हिन्दू-मुस्लिम एजेंडा इस्तेमाल करते रहे हैं, वैसे ही उन्होंने किया, तो फिर वह अलग कहाँ हुए?

इसी तरह, उन पर दिल्ली में धर्म के आधार पर मतदाताओं से वोट मांगने का आरोप लगा है। धर्म के आधार पर दिल्ली में पर्चे बांटे गये। इस प्रकरण में भाजपा की शिकायत पर चुनाव आयोग जाँच कर रहा है।

आम आदमी पार्टी पर हाल ही में विदेशों से चंदा लेने का भी आरोप लगा, जिसकी जांच चल रही है। इसके जवाब में उनकी ओर से कहा गया कि, भाजपा और कांग्रेस भी हिसाब दे, तो वह भी हिसाब दे दें और कांग्रेस व भाजपा के हिसाब से यह सिद्ध हो जाये कि उन्होंने भी विदेश से चंदा लिया है, तो इससे उनकी पार्टी स्वच्छ कैसे साबित हो जायेगी?

इसके बाद इंडिया अगेंस्ट करप्शन के खाते में जमा धन को लेकर भी आरोप लगे, तो जवाब आया कि सब खर्च हो गये। पर सवाल उठता है कि, उस आन्दोलन में जनता स्वतः जुड़ रही थी। शहर से लेकर गाँव तक लोग खुद ही करप्शन के विरुद्ध आन्दोलन में साथ दे रहे थे, ऐसे में इतनी बड़ी रकम कहाँ, क्यूं और कैसे खर्च कर दी गई, इसका एक-एक रूपये का हिसाब अपनी विश्वसनीयता कायम रखने के लिए और खुद को औरों से अलग सिद्ध करने के लिए सार्वजनिक क्यूं नहीं करना चाहिए?

इस सबके अलावा व्यवहारिक दृष्टि से आम आदमी पार्टी के नेताओं की भाषा शैली बेहद निचले स्तर की रहती है। प्रधानमंत्री के पद पर बैठे व्यक्ति जैसे भी हैं, मुख्यमंत्री के पद पर आसीन व्यक्ति जैसे भी हैं, वे सब लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत ही उन पदों पर बैठे हैं। उन्होंने पद किसी और माध्यम से हथियाये नहीं हैं, ऐसे में उन पदों की गरिमा का ध्यान रखते हुए ही शब्दों का चयन कर बोलना चाहिए। पिछले दिनों इस संबंध में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने अरविंद केजरीवाल पर मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।

कुमार विश्वास और दो कदम आगे बढ़ कर बोलते हैं। वह कविता पाठ के बीच में सोनिया गाँधी, मनमोहन सिंह, अटल बिहारी वाजपेई के बारे में ऐसे-ऐसे शब्द बोलते रहे हैं कि, अशिक्षित व्यक्ति भी बोलने से पहले कई बार सोचेगा। वे प्रतिष्ठित पुरस्कारों के संबंध में भी लगातार अशालीन भाषा का प्रयोग करते रहे हैं। जिस मीडिया ने उन्हें इस स्तर पर पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई है, उस मीडिया पर भी वे बेहद भद्दी टिप्पणी करते रहे हैं, वह भी तब, जब वह कवि के साथ एक शिक्षक भी हैं, उनसे ऐसी भाषा शैली की आशा देश भर में किसी को नहीं है।

अधिकाँश लोगों के मन में यह भाव था कि, आम आदमी पार्टी अन्य राजनैतिक दलों से भिन्न है, इसलिए यह स्वच्छ राजनैतिक वातावरण के साथ स्वच्छ शासन-प्रशासन देगी, लेकिन चुनाव जीतने के लिए जब वही पुराने हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, तो फिर भिन्न कहाँ हुए?, विकल्प कहाँ हुए? वैसे ही हुए, जैसे सब हैं, इसलिए सब से बड़ा सवाल यह भी उठता है कि, दिल्ली जैसे छोटे से राज्य की सत्ता हथियाने के लिए कुछ ही दिनों में इतना गिर गये, तो देश की सत्ता पाने के लिए क्या नहीं करेंगे?

आम आदमी पार्टी की ओर से स्टिंग ऑपरेशन के बाद जैसी प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है, वह नैतिकता की दृष्टि से ठीक नहीं है। औरों से भिन्न बनाये रखने के लिए सभी आरोपी नेताओं और प्रत्याशियों को पार्टी को तत्काल निलंबित कर देना चाहिए था और चुनाव आयोग की जांच के बाद अंतिम निर्णय लेना चाहिए था, लेकिन खुद ही जाँच कर और जांच के बाद स्टिंग ऑपरेशन पर सवाल उठा कर आम आदमी पार्टी ने खुद पर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगवा लिया है। अब अधिकाँश लोग यही समझ रहे हैं कि आम आदमी पार्टी की झाडू अपने घर का कूड़ा साफ़ करने की बजाये कीचड़ में भिगो कर औरों को मारने के ही काम में लाई जाती रहेगी।

बी.पी.गौतम
बी.पी.गौतम

सोचने की बात यह है कि जिन दलों की आलोचना कर आम आदमी पार्टी खड़ी की गई है, वह दल बहुत पुराने हैं, तब उन पर आरोप लगते हैं, लेकिन राजनीति के धरातल पर आम आदमी पार्टी अभी शिशु ही है और शिशु पर भी जवान और बुजुर्ग दलों जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं, तो सवाल यह भी उठता है कि, जब यह शिशु जवान होगा, तब क्या करेगा?, इसीलिए अधिकाँश लोग स्टिंग ऑपरेशन के साथ खड़े नज़र आ रहे हैं।

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