उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय

उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय
उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में आज लखनऊ में सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

खरीफ विपणन वर्ष 2013-14 में मूल्य समर्थन योजना के अन्तर्गत धान क्रय नीति अनुमोदित
मंत्रिपरिषद ने खरीफ विपणन वर्ष 2013-14 में मूल्य समर्थन योजना के अन्तर्गत धान क्रय नीति को अनुमोदित करते हुए विभिन्न श्रेणी के धान का समर्थन मूल्य भी निर्धारित कर दिया गया है। इसके तहत कामन धान की श्रेणी के लिए 1310 रुपए प्रति कुन्टल तथा ग्रेड-ए श्रेणी के लिए 1345 रुपए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है। 01 अक्टूबर, 2013 से 28 फरवरी, 2014 की अवधि में धान क्रय का निर्णय लेते हुए मंत्रिपरिषद ने 25 लाख मीट्रिक टन धान क्रय का कार्यकारी लक्ष्य निर्धारित किया है। दिनांक 28 फरवरी, 2014 तक क्रय केन्द्रों पर किसानों द्वारा लाए जाने वाले धान की समस्त मात्रा क्रय की जाएगी। इस खरीफ विपणन वर्ष में केवल किसानों से धान क्रय करने का निर्णय लिया गया है। विक्रेता किसानों का मोबाइल/फोन नं0 भी धान क्रय पंजिका में अंकित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश में 3000 क्रय केन्द्र स्थापित किए जाएंगे। जनपद स्तर पर केन्द्रों का चयन जिलाधिकारी द्वारा किया जाएगा। प्रत्येक क्रय केन्द्र से ग्रामों के सम्बद्धीकरण की व्यवस्था संबंधित जनपदों के जिलाधिकारियों द्वारा की जाएगी। किसानों को धान के मूल्य का भुगतान आर0टी0जी0एस0 के माध्यम से उनके बैंक खाते में किया जाएगा। इसके अलावा किसानों के लिखित अनुरोध पर ‘पेयीज एकाउण्ट ओनली’ चेक के माध्यम से भी भुगतान की व्यवस्था रहेगी। धान क्रय सरकारी एजेंसियों के अलावा कच्चा आढ़तियों (कमीशन एजेण्ट) के माध्यम से होगी।
सार्वजनिक, निजी एवं सहकारी क्षेत्र की नयी आवासीय योजनाओं में आर्थिक दृष्टि से दुर्बल एवं अल्प आय वर्गों के व्यक्तियों के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने से सम्बन्धित नीति में संशोधन
समाज के आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्गों की मकान खरीदने की क्रय-क्षमता पर विशेष ध्यान देने हेतु शासनादेश दिनांक 26 सितम्बर 2011 द्वारा निर्गत नीति के कतिपय प्राविधान अव्यवहारिक होने के कारण इसमें इस दृष्टि से संशोधन किया जाना आवश्यक पाया गया कि उक्त आय वर्गों हेतु ‘सेल्फ सस्टेनेबल’ आधार पर आवासों का निर्माण संभव हो सके और विकासकर्ता ऐसे भवनों का निर्माण करने हेतु स्वतः प्रेरित हों। उक्त के परिप्रेक्ष्य में मंत्रिपरिषद द्वारा ये निर्णय लिए गए कि हडको के पुनरीक्षित मानकों के अनुसार ई0डब्ल्यू0एस0 परिवार की वार्षिक आय सीमा 1 लाख रुपये तक एवं एल0आई0जी0 परिवार की 1 लाख रुपए से अधिक, परन्तु 2 लाख रुपए तक निर्धारित की गयी है, जो प्रत्येक वर्ष कास्ट-इन्डेक्स के आधार पर पुनरीक्षित की जायेगी।
ई0डब्ल्यू0एस0 के लिए भूखण्डीय विकास में भूखण्ड का क्षेत्रफल 30-50 वर्ग मीटर एवं एल0आई0जी0 का 40-50 वर्ग मीटर तथा ग्रुप हाउसिंग में आवासीय इकाई का बिल्ट-अप एरिया ई0डब्ल्यू0एस0 के लिए 25-35 वर्ग मीटर तथा एल0आई0जी0 के लिए 36-48 वर्ग मीटर निर्धारित की गयी है। इस नीति में भूखण्डीय विकास (प्लाटेड डेवलपमेंट) तथा ग्रुप हाउसिंग दोनों प्रकार के विकास में विकासकर्ता द्वारा ई0डब्ल्यू0एस0 एवं एल0आई0जी0 भवनों का निर्माण करना अनिवार्य है।
04 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल की समस्त नई आवासीय योजनाओं में ई0डब्ल्यू0एस0 तथा एल0आई0जी0 के लिए न्यूनतम 10-10 प्रतिशत (कुल 20 प्रतिशत) भवनों का निर्माण उसी योजना के अन्तर्गत अनिवार्य किया गया है। 04 हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल की योजनाओं मंे ई0डब्ल्यू0एस0 एवं एल0आई0जी0 भवनों का निर्माण यथासम्भव उसी स्थल पर अथवा 10 लाख एवं अधिक जनसंख्या वाले नगरों में योजना स्थल के 05 किलोमीटर के अर्द्धव्यास व अन्य नगरों में 02 किलोमीटर के अर्द्धव्यास के अन्दर किया जायेगा। यदि भवनों का निर्माण संभव न हो, तो उसके एवज में विकासकर्ता द्वारा विकास प्राधिकरण/आवास एवं विकास परिषद को ‘शेल्टर फीस’ देय होगी।
एकल आवासीय भवन ई0डब्ल्यू0एस0 एवं एल0आई0जी0 भवन निर्माण के प्राविधानों से मुक्त रहेंगे। एक से अधिक भूखण्ड/फ्लैट की आवासीय परियोजना/योजना पर यह प्राविधान लागू होंगे। हडको द्वारा पुनरीक्षित मानकों के अनुसार ई0डब्ल्यू0एस0 भवन का सीलिंग मूल्य 3.25 लाख रुपये तथा एल0आई0जी0 भवन का 07 लाख रुपये निर्धारित किया गया है, जिसे प्रत्येक वर्ष कास्ट इण्डेक्स के आधार पर पुनरीक्षित किया जायेगा।
ई0डब्ल्यू0एस0 एवं एल0आई0जी0 भवनों का समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित करने हेतु उक्त भवनों के सापेक्ष बैंक गारण्टी देय होगी, अथवा विकासकर्ता द्वारा योजना की आंशिक भूमि शासकीय अभिकरण के पक्ष में बंधक रखी जा सकती है। विकासकर्ता द्वारा यदि ई0डब्ल्यू0एस0 एवं एल0आई0जी0 भवनों का निर्माण नहीं किया जाता है अथवा अधूरा छोड़ा जाता है, तो प्राधिकरण/परिषद द्वारा बैंक गारण्टी को जब्त कर एवं भुना कर अथवा बन्धक रखी गई भूमि को जब्त कर उसके विक्रय से प्राप्त धनराशि से ई0डब्ल्यू0एस0 एवं एल0आई0जी0 भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त डिफाल्टर विकासकर्ता के विरुद्ध प्राधिकरण/आवास एवं विकास परिषद द्वारा नियमानुसार यथोचित दण्डात्मक कार्यवाही करने पर भी विचार किया जायेगा।
इस नीति के अनुसार ई0डब्ल्यू0एस0 एवं एल0आई0जी0 भवनों का निर्माण योजना के अन्य आवासीय स्टाक की भौतिक प्रगति के अनुपात में किया जाएगा। यह व्यवस्था हाईटेक टाउनशिप तथ इन्टीग्रेटेड टाउनशिप योजनाओं में भी लागू होगी। ई0डब्ल्यू0एस0 एवं एल0आई0जी0 भवनों की लागत को क्रास-सब्सिडाईज करने हेतु विकासकर्ता को उक्त भवनों के तल क्षेत्रफल के समतुल्य आवासीय उपयोग का निःशुल्क एल0ए0आर0 उसी योजनान्तर्गत अनुमन्य होगा। ई0डब्ल्यू0एस0 एवं एल0आई0जी0 भवनों का आवंटन शासन द्वारा उपाध्यक्ष/आवास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति के माध्यम से किया जायेगा।
सार्वजनिक, निजी एवं सहकारी क्षेत्र की योजनाओं में ई0डब्ल्यू0एस0 एवं एल0आई0जी0 भवनों का आवंटन लीज होल्ड के आधार पर किया जायेगा, जिसके विक्रय/हस्तान्तरण पर आवंटन की तिथि से 5 वर्षों अथवा देय लागत जमा करने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक प्रतिबन्ध रहेगा और उक्त अवधि के पश्चात लाभार्थी के पक्ष में स्वतः फ्री-होल्ड माना जाएगा, जिसके संबंध में प्राधिकरण/आवास एवं विकास परिषद द्वारा औपचारिक आदेश निर्गत किया जाएगा। ई0डब्ल्यू0एस0 एवं एल0आई0जी0 भवनों ‘हेरिटेबल’ होंगे। एक से अधिक ई0डब्ल्यू0एस0 अथवा एल0आई0जी0 भवनों का अमलगमेशन अथवा उन्हें जोड़कर एक इकाई/भवन बनाना प्रतिबन्धित होगा।
चक गंजरिया प्रक्षेत्र, लखनऊ में 05 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के डेरी प्लाण्ट की स्थापना हेतु दुग्ध विकास विभाग की 20 एकड़ भूमि बनासकांठा सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ गुजरात को आवंटित करने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने जनपद लखनऊ में 05 लाख लीटर प्रतिदिन दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के एक अत्याधुनिक डेरी प्लाण्ट की स्थापना हेतु चक गंजरिया प्रक्षेत्र में उपलब्ध दुग्ध विकास विभाग की 20 एकड़ भूमि को उ0प्र0 राज्य औद्योगिक विकास निगम के माध्यम से बनासकांठा सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ पालनपुर गुजरात को आवंटित करने का निर्णय लिया है।
यह भूमि यू.पी.एस.आई.डी.सी. के माध्यम से निर्धारित प्रक्रियानुसार लीज पर बनासकांठा सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ को डेरी प्लाण्ट की स्थापना हेतु उपलब्ध कराई जाएगी। बनासकांठा सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ द्वारा दुग्ध का उपार्जन प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों से किया जाएगा। राज्य के किसानों से पर्याप्त दुग्ध उपार्जन न हो पाने की स्थिति में, प्लाण्ट के संचालन हेतु आवश्यक दुग्ध की मात्रा अन्य प्रान्तों से प्राप्त की जा सकेगी। भूमि हस्तांतरण के उपरान्त 18 माह के भीतर बनासकांठा सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ को दुग्ध प्रसंस्करण प्लाण्ट लगाना होगा।
अत्याधुनिक डेरी प्लाण्ट की स्थापना हेतु उ0प्र0 राज्य औद्योगिक विकास निगम द्वारा बनासकांठा सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ को उक्त भूमि 4800 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से आवंटित किये जाने के फलस्वरूप प्राप्त धनराशि में से, 12.50 प्रतिशत अर्थात 600 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से प्रशासनिक व अन्य व्यय काटने के उपरान्त, 2200 प्रति वर्गमीटर के आधार पर आगणित धनराशि राजकोष में तथा अवशेष 2000 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से आगणित की गयी धनराशि लखनऊ में प्रस्तावित मेट्रो फण्ड में उ0प्र0 राज्य औद्योगिक विकास निगम द्वारा जमा की जाएगी। ज्ञातव्य है कि बनासकांठा सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ गुजरात को-आपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (अमूल ब्रान्ड) की एक इकाई है।
अनुसूचित जाति सब प्लान व ट्राइबल सब प्लान के क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश जारी
मंत्रिपरिषद द्वारा अनुसूचित जाति सब प्लान (एस.सी.एस.पी.) व ट्राइबल सब प्लान (टी0एस0पी0) के क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश जारी किया गया है। इसके तहत राज्य में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या, जो इस समय 21.21 प्रतिशत है, के अनुपात में एस.सी.एस.पी. तथा टी.एस.पी. हेतु राज्य के कुल योजनांतर्गत परिव्यय का 21.21 प्रतिशत एकमुश्त परिव्यय नियोजन विभाग द्वारा समाज कल्याण विभाग को पूर्व की भांति उपलब्ध कराया जाएगा। सभी विकास विभाग एस.सी./एस.टी. के कल्याणार्थ विकासात्मक अंतराल का अनुमान लगाने के पश्चात् आवश्यकताओं एवं प्राथमिकताओं का निर्धारण करते हुए योजनाएं तैयार करेंगे। इस एकमुश्त परिव्यय को समाज कल्याण आयुक्त/प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग द्वारा संबंधित विकास विभागों को उनकी आवश्यकताओं को देखते हुए मुख्य सचिव से अनुमोदन प्राप्त करने के पश्चात् आवंटित किया जाएगा।
लाभार्थीपरक योजनाओं के अन्तर्गत एस.सी./एस.टी. लाभार्थियों के सापेक्ष एस0सी0एस0पी0/टी0एस0पी0 के अन्तर्गत शत-प्रतिशत परिव्यय आवंटित किया जाएगा। जबकि ऐसी बसावटों/ग्रामों/ग्राम पंचायतों अथवा नगर पंचायतों, जिनमें एस.सी./एस.टी. की जनसंख्या कम से कम 25 प्रतिशत हो, में क्षेत्र आधारित लघु आधारभूत संरचनाओं के निर्माण संबंधी परियोजनाओं पर शत-प्रतिशत परिव्यय एस.सी.एस.पी./टी.एस.पी. के अन्तर्गत आवंटित किया जाएगा। इसके अलावा वृहद आधारभूत परियोजनाओं की स्थापना, जिनका विस्तार चाहे एक जनपद तक सीमित हो अथवा जिनसे एक से अधिक जनपद आच्छादित होते हों, के लिए योजना की लागत का 21.21 प्रतिशत परिव्यय एस.सी.एस.पी./टी.एस.पी. से उपलब्ध कराया जाएगा।
नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्वयन का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा के नगरीय क्षेत्र में दिल्ली के समकक्ष अवस्थापना सुविधाएं विकसित किए जाने हेतु नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्वयन का निर्णय लिया है। डी0एम0आर0सी0 इन परियोजनाओं की डी0पी0आर0 तैयार की गई है, जिसमें लगभग 5 हजार 64 करोड़ रुपए लागत सम्भावित है। मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण, संचालन एवं अनुरक्षण हेतु एस0पी0वी0 का गठन किया जाएगा।
इन परियोजनाओं का वित्त पोषण 20 प्रतिशत भारत सरकार द्वारा तथा 20 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा शेष 60 प्रतिशत धनराशि वित्तीय संस्थाओं से ऋण के रूप में प्राप्त किया जाएगा। राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले वित्तीय अंशदान का वहन नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा द्वारा अपने क्षेत्रों में पड़ रही लम्बाई के अनुपात में किया जाएगा। इस प्रकार नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा मेट्रो रेल परियोजना के क्रियान्वयन से राज्य सरकार पर कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। यह भी फैसला किया गया है कि परियोजना के डी0पी0आर0 को भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय को अग्रेत्तर कार्यवाही हेतु सन्दर्भित किया जाए। परियोजना के किसी भाग में संशोधन की स्थिति में निर्णय लेने हेतु नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा के प्राधिकरण बोर्ड को अधिकृत किया गया है। परियोजना के अनुश्रवण हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का भी गठन किया जाएगा।
 10 ईको सेंसिटिव जोन निर्धारित करते हुए भारत सरकार को अधिसूचना जारी करने हेतु प्रेषित करने का निर्णय मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में 10 ईको सेंसिटिव जोन निर्धारित करते हुए भारत सरकार को अधिसूचना जारी करने हेतु प्रेषित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत इको सेंसिटिव जोन की सीमा 01 कि0मी0 निर्धारित करने का प्रस्ताव किया गया है। जो 10 ईको सेंसिटिव जोन बनाने के निर्णय लिए गए हैं। उनमें बखीरा वन्य जीव विहार, संतकबीर नगर, पार्वतीअरगा वन्य जीव विहार, गोण्डा, चन्द्रप्रभा वन्य जीव विहार, चन्दौली, विजय सागर वन्य जीव विहार, महोबा, महावीर स्वामी वन्य जीव विहार, ललितपुर, रानीपुर वन्य जीव विहार, चित्रकूट, समसपुर वन्य जीव विहार, रायबरेली, कछुआ वन्य जीव विहार, वाराणसी, जय प्रकाश नारायण वन्य जीव विहार, बलिया, नवाबगंज वन्य जीव विहार उन्नाव सम्मिलित हैं।
इको सेंसिटिव जोन का निर्धारण हो जाने से राष्ट्रीय पार्क एवं वन्य जीव विहारों की सीमा से निर्धारित ईको सेंसिटिव जोन में चलने वाली गतिविधियों के सम्बन्ध में सुस्पष्ट प्राविधान सुनिश्चित हो जाएंगे एवं तद्नुसार ही कार्य किए जा सकेंगे। ईको सेंसिटिव जोन के बनाए जाने का मुख्य उद्देश्य वन, वन्य जीव एवं पर्यावरण की सुरक्षा करना है ताकि विभिन्न गतिविधियों/क्रियाकलापों को इस प्रकार नियंत्रित किया जा सके, जिससे उनका प्रभाव राष्ट्रीय पार्क एवं वन्य जीव विहारों पर न पड़े अथवा न्यूनतम हो।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, सिद्धार्थनगर की स्थापना हेतु पर्यटन विभाग की 50 एकड़ भूमि उच्च शिक्षा विभाग को हस्तान्तरित
मंत्रिपरिषद ने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर की स्थापना हेतु पर्यटन विभाग की 50 एकड़ भूमि उच्च शिक्षा विभाग को हस्तान्तरित करने का निर्णय लिया है।
जनपद लखनऊ की 1082.96 एकड़ तथा हरदोई की 259.09 एकड़ भूमि को उत्तर प्रदेश सैनिक पुनर्वास निधि के पक्ष में नवीनीकृत पट्टाविलेख निष्पादित करने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने राजकीय कृषि प्रक्षेत्र अटारी, जनपद लखनऊ की 1082.96 एकड़ तथा जनपद हरदोई की 259.09 एकड़ भूमि को अलग-अलग प्रदर्शित करते हुए उत्तर प्रदेश सैनिक पुनर्वास निधि के पक्ष में नवीनीकृत पट्टाविलेख निष्पादित करने का निर्णय लिया है। इस भूमि का उपयोग उन्नतशील बीजों के उत्पादन हेतु उत्तर प्रदेश सैनिक पुनर्वास निधि द्वारा किया जाएगा। इससे प्राप्त लाभ का उपयोग ऐसे भूतपूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए किया जाएगा, जो उत्तर प्रदेश सैनिक पुनर्वास निधि के लाभार्थी हैं।
वाहनों के रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र स्मार्ट कार्ड पर जारी करने के 04 दिसम्बर, 2006 के निर्णय को अपास्त कर भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप टेण्डर आमंत्रित करने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने वाहनों के रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र स्मार्ट कार्ड पर जारी करने के 04 दिसम्बर, 2006 के निर्णय को अपास्त करते हुए मेसर्स जोडियाक डाट काम साल्यूशंस प्रा0लि0 के पक्ष में जारी लेटर आॅफ इंडेण्ट (एल.ओ.वाई.) को निरस्त करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही भारत सरकार की अधिसूचना के अनुसार नए सिरे से टेण्डर आमंत्रित करके इस योजना को लागू करने एवं इसके लिए परिवहन आयुक्त को प्राधिकृत करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी प्रदान कर दी है।
उ0प्र0 विधान सभा एवं विधान परिषद के वर्तमान सत्र का सत्रावसान कराए जाने का प्रस्ताव अनुमोदित
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश विधान सभा एवं विधान परिषद के वर्तमान सत्र का सत्रावसान तत्काल प्रभाव से कराए जाने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
ललितपुर विद्युत परियोजना से विद्युत निकासी हेतु पारेषण तंत्र स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने ललितपुर विद्युत परियोजना से विद्युत निकासी हेतु पारेषण तंत्र स्थापित करने के लिए उ0प्र0पा0ट्रा0का0लि0 द्वारा पीपीपी प्रणाली में टैरिफ बेस्ट काॅम्पटिटिव बिडिंग प्रक्रिया के आधार पर निष्पादित किए जाने की अनुमति प्रदान कर दी है। इसके अलावा इस परियोजना हेतु एलाइनमेन्ट परिवर्तन, पीपीपी मोड, सलाहकार चयन, इम्पावर्ड कमेटी की नियुक्ति, बिड प्रोसेस कोआर्डिनेटर का नामांकन, बिड मूल्यांकन समिति का गठन तथा स्पेशल परपज वेहिकल के गठन के उपरान्त विधिक उत्तरदायित्व, प्रसंस्करण की बाध्यता के अतिरिक्त स्टैण्डर्ड बिडिंग डाॅक्यूमेन्ट के अनुरूप पारेषण तंत्र का निर्माण तथा आर0एफ0पी0 प्रपत्रों के निर्गमन हेतु अनुमोदन का अधिकार इम्पावर्ड कमेटी को लेने हेतु अधिकृत करने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित कर दिया गया है।
ज्ञातव्य है कि उ0प्र0पा0ट्रा0का0लि0 तथा ललितपुर पावर जनरेशन कम्पनी, जो प्रदेश को अपनी सम्पूर्ण उत्पादित विद्युत देगी, के बीच हुए ऊर्जा क्रय अनुबन्ध के अनुसार विद्युत निकासी का उत्तरदायित्व राज्य यूटिलिटी (यू0पी0पी0टी0सी0एल0) का होगा। यू0पी0पी0टी0सी0एल0 के प्रस्ताव पर 765 के0वी ललितपुर-आगरा लाइन का निर्माण यथावत तथा 765 के0वी0 ललितपुर-जवाहरपुर एवं जवाहरपुर-आगरा लाइनों का एलाइनमेन्ट परिवर्तित कर 765 के0वी0 ललितपुर-(घाटमपुर-भोगनीपुर-बिल्हौर)-आगरा लाइन का निर्माण पीपीपी मोड पर कराने तथा इस संशोधित परियोजना (अनुमानित लागत 3036 करोड़ रुपए) को पीपीपी मोड से टैरिफ बेस्ट काम्पटिटिव बिडिंग के आधार पर कराए जाने का अनुमोदन भी ई0टी0एफ0 की जुलाई बैठक में दिया गया था।
विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि योजना के मार्गदर्शी सिद्धांतों में संशोधन सम्बन्धी प्रस्तावों को मंजूरी
मंत्रिपरिषद ने विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि योजना के मार्गदर्शी सिद्धांतों में कुछ संशोधन सम्बन्धी प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान करते हुए निर्णय लिया है कि विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि योजना के अन्तर्गत स्वीकृत कार्यों के लिए राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त राजकीय निर्माण निगम/कार्यदायी विभाग/राज्य सरकार के उपक्रम/निगमित निकाय, जो निर्माण कार्यों के लिए अधिकृत हैं, उन्हें भी इस योजना के अन्तर्गत कार्यदायी संस्था के रूप में इस शर्त के साथ नामित किया जाए कि ऐसी कार्यदायी संस्थाएं इस योजना के अन्तर्गत सेंटेज चार्जेज की मांग नहीं करेंगी। जनपद स्तर पर उपलब्ध ऐसी कार्यदायी संस्थाओं की सूची जिलाधिकारी द्वारा प्रतिवर्ष तैयार की जाएगी। परन्तु इस सूची में ऐसी कार्यदायी संस्थाओं को, जिन्होंने पिछले वर्ष के कार्यों को गुणवत्ता के साथ समयबद्ध रूप से पूर्ण नहीं किया है, पुनः सम्मिलित नहीं किया जाएगा। विधायक निधि की धनराशि से कोई भी कार्य स्वयंसेवी संगठनों (छळव्श्े)/निजी ठेकेदारों के माध्यम से नहीं कराया जाएगा।
निर्णय के अनुसार विधान मण्डल के मा0 सदस्य द्वारा एक वित्तीय वर्ष में अलग-अलग चिन्हित किए जाने योग्य कार्यों के प्रस्ताव दिए जा सकते हैं, किन्तु शर्त यह होगी किसी एक कार्य की अनुमानित लागत 25 लाख रुपए से अधिक न हो। विधान मण्डल के मा0 सदस्य द्वारा कार्यों के प्रस्ताव की सम्पूर्ण लागत की संस्तुति की जाएगी। किसी कार्य के सापेक्ष धनराशि इंगित करते हुए इस धनराशि को अवमुक्त कराने की संस्तुति नहीं की जाएगी।
यह भी निर्णय लिया गया है कि इलेक्ट्राॅनिकी परियोजनाओं के अन्तर्गत सी0सी0टी0वी0, वीडियो कैमरा सिस्टम को शामिल किया जाए। सी0सी0टी0वी0/वीडियो कैमरा सिस्टम की स्थापना के उपरान्त अनुरक्षण का कार्य सम्बन्धित जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक द्वारा गृह विभाग की निधियों से कराया जाएगा। मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि योजना के अन्तर्गत ऐसी संस्था के कार्यों की अनुशंसा नहीं की जाएगी, जहां अनुशंसा करने वाले मा0 सदस्य एवं उनके परिवार का कोई भी सदस्य, ऐसी संस्था/ट्रस्ट के पदाधिकारी हैं, जो निजी लाभ के लिए चलाई जा रही है। परन्तु जहां ऐसी संस्था सार्वजनिक हित में कार्य कर रही हो, वहां विधान मण्डल क्षेत्र विकास निधि योजना के मार्गदर्शी सिद्धांतों के सीमा के अधीन कार्य प्रस्तावित किए जा सकते हैं।
प्रदेश सरकार के स्वामित्व के भवनों की ध्वस्तीकरण नीति विषयक लोक निर्माण विभाग के दो शासनादेश निरस्त
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश राज्य के स्वामित्व के भवनों की ध्वस्तीकरण नीति विषयक लोक निर्माण विभाग के दो शासनादेशों को निरस्त कर दिया है।
ज्ञातव्य है कि प्रदेश सरकार के स्वामित्व के भवनों के ध्वस्तीकरण के संबंध में लोक निर्माण विभाग के शासनादेश दिनांक 26 मार्च, 2008 द्वारा नीति निर्धारित की गई थी। शासनादेश दिनांक 26 सितम्बर, 2011 द्वारा उक्त नीति को संशोधित किया गया। लखनऊ शहर स्थित सिंचाई विभाग के परिकल्प नगर (पूर्व) आवासीय परिसर में स्थित आवासीय एवं कार्यालय भवनों को ध्वस्त करने संबंधी प्रकरण/प्रक्रिया में प्रथम दृष्टया पायी गयी अनियमितताओं के संबंध में सिंचाई विभाग द्वारा सेवानिवृत्त आई.ए.एस. अधिकारी एस.ए.टी. रिजवी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। जांच अधिकारी की जांच आख्या के आलोक में प्रमुख अभियन्ता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग द्वारा शासनादेश दिनांक 26 मार्च, 2008 एवं शासनादेश दिनांक 26 सितम्बर, 2011 में कतिपय विसंगतियों/कमियों के कारण निरस्त किए जाने की संस्तुति की गई।
उक्त दोनों शासनादेशों के निरस्त होने की दशा में ध्वस्तीकरण हेतु पूर्व से विद्यमान लोक निर्माण विभाग के अनुरक्षण मैनुअल पार्ट-।। (भवन), वित्तीय हस्तपुस्तिका खण्ड-1 व खण्ड-5 तथा उ0प्र0 कार्य नियमावली, 1975 के प्राविधानों के अन्तर्गत कार्यवाही की जाती रहेगी। उ0प्र0 म्यूनिसिपल कार्पोरेशन एक्ट 1959 की धारा-330 व 331 के द्वारा ध्वस्तीकरण हेतु नगरीय क्षेत्रों में समानान्तर व्यवस्था प्रतिपादित है जिसको आवश्यकतानुसार विकल्प के रूप में अपनाया जा सकता है।
ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना हेतु 48 जनपदों में संबंधित लीड बैंक को न्यूनतम लीज रेन्ट पर 33 वर्ष के लिए भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना के अन्तर्गत प्रदेश के 48 जनपदों में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) की स्थापना हेतु भूमि संबंधित जनपद के लीड बैंक को न्यूनतम लीज रेन्ट अर्थात 100 रुपए वार्षिक दर पर 33 वर्ष की अवधि हेतु उपलब्ध कराए जाने का निर्णय लिया है।
यह भी निर्णय लिया कि लीज की अवधि समाप्त होने पर लीज की समय वृद्धि हेतु यथा समय निर्णय लिया जाएगा। संबंधित भूमि प्रबन्धक समिति/राज्य सरकार के संबंधित विभाग, जिनका स्वामित्व संबंधित भूमि पर है, के जनपद स्तरीय अधिकारी व जनपद के लीड बैंक के मध्य मेमोरेण्डम आॅफ अण्डरटेकिंग इस आशय का निष्पादित किया जाए कि भूमि संबंधित लीड बैंक के पास तब तक उपलब्ध रहेगी, जब तक आरसेटी द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम बन्द नहीं कर दिया जाता है। संबंधित लीड बैंक द्वारा लीज पर दी गयी भूमि का प्रयोग केवल आरसेटी की स्थापना एवं संचालन हेतु किया जाएगा। आरसेटी द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम बन्द कर दिये जाने के फलस्वरूप भूमि राज्य सरकार के संबंधित विभाग को स्वतः वापस हो जाएगी।
ज्ञातव्य है कि भारत सरकार द्वारा स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना को पुनर्गठित करते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का संचालन प्रारम्भ किया गया है। इसके तहत गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को प्रशिक्षण दिलाकर उन्हें रोजगार युक्त बनाए जाने के लिए प्रदेश के समस्त जिलों में संबंधित लीड बैंक के माध्यम से आरसेटी की स्थापना किए जाने का निर्णय लिया है। पहले चरण में 18 जनपदों में आरसेटी की स्थापना की कार्यवाही प्रगति पर है। द्वितीय चरण में 48 जनपदों में आरसेटी की स्थापना हेतु मंत्रिपरिषद ने भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। द्वितीय चरण में एटा, झांसी, इलाहाबाद, फतेहपुर, कौशाम्बी, कानुपर नगर, मिर्जापुर, सहारनपुर, अमरोहा, शाहजहांपुर, पीलीभीत, फिरोजाबाद, कासगंज, हाथरस, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट, कानपुर देहात, इटावा, कन्नौज, औरैया, चन्दौली, सोनभद्र, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, कुशीनगर, बाराबंकी, अम्बेडकरनगर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, बदायूं, आजमगढ़, लखीमपुर खीरी, बिजनौर, बांदा, अलीगढ़, देवरिया, महाराजगंज, सन्तकबीर नगर, मुजफ्फरनगर, बागपत, प्रतापगढ़, बलिया, गोण्डा तथा जालौन जनपद शामिल हैं।
ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कारिडोर परियोजना हेतु मीरजापुर में लोक निर्माण विभाग की 1.6015 हेक्टेयर भूमि रेल मंत्रालय को समूल्य अन्तरित करने का निर्णय
मंत्रिपरिषद ने ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कारिडोर परियोजना के निर्माण हेतु जनपद मीरजापुर की चुनार व सदर तहसीलों में लोक निर्माण विभाग की कुल 1.6015 हेक्टेयर भूमि का समूल्य अन्तरण रेल मंत्रालय के पक्ष में करने का निर्णय लिया है। उक्त भूमि कुल मूल्यांकन 20603084.48 रुपए (दो करोड़ छः लाख, तीन हजार चैरासी रुपए अड़तालिस पैसे) है। लोक निर्माण विभाग के राजस्व प्राप्ति खाते में मूल्यांकन धनराशि जमा किए जाने के उपरान्त परियोजना के निर्माण हेतु भूमि रेल मंत्रालय (भारत सरकार) के पक्ष में अन्तरित की जाएगी।
बौद्ध परिपथ पर्यटन विकास योजना के संशोधित कोआपरेशन एग्रीमेन्ट को सैद्धान्तिक अनुमोदन
मंत्रिपरिषद ने बौद्ध परिपथ पर्यटन विकास योजना के लिए केन्द्रीय पर्यटन मंत्रालय, अन्तर्राष्ट्रीय वित्त निगम, उत्तर प्रदेश राज्य तथा बिहार राज्य के मध्य निष्पादित होने वाले संशोधित कोआपरेशन एग्रीमेन्ट को हस्ताक्षरित किए जाने व इसके क्रियान्वयन के प्रस्ताव को सैद्धान्तिक अनुमोदन प्रदान कर दिया है। मंत्रिपरिषद ने योजना के क्रियान्वयन हेतु यथावश्यक अग्रेतर कार्यवाही के संबंध में निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।

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