उत्तर प्रदेश के विकास को लेकर हुई गंभीर चर्चा

– मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष डॉ. जिम योंग किम के बीच बनी सहमति

उत्तर प्रदेश के विकास को लेकर हुई गंभीर चर्चा
उत्तर प्रदेश के विकास को लेकर हुई गंभीर चर्चा

विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष डॉ.जिम योंग किम ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस मुलाक़ात में उत्तर प्रदेश के विकास के लिए बीस हजार करोड़ रुपये की अनेक परियोजनाओं के लिए आर्थिक सहयोग पर सहमति बनी। इन में सड़क सुधार, शहरों के सॉलिड वेस्ट का मैनेजमेंट, पर्यटन, ऊर्जा और लखनऊ में मेट्रो रेल परियोजना आदि हैं। इन योजनाओं की प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट (पीपीआर) राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार के आर्थिक कार्य विभाग को अनुमोदन के लिए भेजी जाएगी।

इस मुलाक़ात के बाद मुख्यमंत्री और  डॉ.किम ने संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया। डॉ किम ने कहा, कि गरीबी उन्मूलन विश्व बैंक का मूल सिद्धांत है। उत्तर प्रदेश का आर्थिक विकास हमारे लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया में घोर गरीबी में जीवन यापन करने वाले आठ फीसदी लोग उत्तर प्रदेश में बसते हैं। इस दौरान उन्होंने बैंक द्वारा दी जाने वाली आर्थिक मदद का ब्यौरा भी दिया। सडकों के उद्धार के लिए 8250 करोड़ रुपये, पर्यटन विकास के लिए लगभग 1650 करोड़ रुपये, शहरों के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 2436 करोड़ रुपये और ऊर्जा क्षेत्र के लिए 2750 करोड़ रुपये की परियोजना पर सहमती बनी है।

डॉ.किम ने कहा कि, बैंक रोज़गार बढ़ाने पर भी ज़ोर देता है क्योंकि लोक समृद्धि भी बैंक के मूल एजेंडा में शामिल है। उत्तर प्रदेश में निजी क्षेत्र पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि भारत एक विकासशील देश है और विकासशील देशों में 90 प्रतिशत रोजगार निजी क्षेत्र में निर्मित होते हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ़्तार पर उन्होंने कहा कि, भारतीय अर्थव्यवस्था जल्दी रफ्तार पकड़ेगी। इसके लिए लगभग एक खरब डॉलर के निवेश की ज़रूरत है। इस निवेश का 53 प्रतिशत भाग सार्वजनिक क्षेत्र से और 47 फीसदी भाग निजी क्षेत्र से पूरा करने की योजना है। अखिलेश सरकार की युवाओं को लैपटॉप देने की योजना पर उन्होंने कहा कि लैपटॉप के साथ ही इन्टरनेट कनेक्टिविटी पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश के साथ बैंक के अनुभव को सकारात्मक बताया। इन परियोजनाओं को आर्थिक सहायता देने के साथ ही बैंक ने शर्त रखी है कि आर्थिक सहायता पाने के लिए योजनाओं का व्यवहारिक होना आवश्यक है।

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