उत्तर प्रदेश के बिना देश का विकास संभव नहीं: मुख्यमंत्री

  • मुख्यमंत्री की 14वें वित्त आयोग के साथ बैठक
 
  • केन्द्रीय संसाधनों के अन्तरण का सर्वप्रथम उद्देश्य पिछड़े राज्यों को पहले कम से कम राष्ट्रीय औसत के स्तर पर लाने का होना चाहिए
 
  • सहायता अनुदान तथा राज्य विशिष्ट अनुदान के तहत 72526 करोड़ रु0 की सहायता की मांग
 
  • नगरीय निकायों में अवस्थापना सुविधाओं के उन्नयन के लिए वर्ष 2015-2020 के दौरान 2,12,658 करोड़ रु0 का सहायता अनुदान उपलब्ध कराने का आग्रह
 
  • पंचायतीराज संस्थाओं में परिसम्पत्तियों के रख-रखाव एवं नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए लगभग 70,485 करोड़ रु0 की सहायता की माँग
 
लखनऊ स्थित योजना भवन में 14वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डा. वाई.वी. रेड्डी के नेतृत्व में आए आयोग के सदस्यों प्रो. अभिजीत सेन, सुषमा नाथ, डा. एम. गोविन्दा राव, डा. सुदीप्तो मुंडले एवं सचिव ए.एन. झा आदि के साथ विचार-विमर्श करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।
लखनऊ स्थित योजना भवन में 14वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डा. वाई.वी. रेड्डी के नेतृत्व में आए आयोग के सदस्यों प्रो. अभिजीत सेन, सुषमा नाथ, डा. एम. गोविन्दा राव, डा. सुदीप्तो मुंडले एवं सचिव ए.एन. झा आदि के साथ विचार-विमर्श करते मुख्यमंत्री अखिलेश यादव।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल आबादी वाले राज्य के विकास के बिना देश का विकास संभव नहीं है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि केन्द्रीय संसाधनों के अन्तरण का सर्वप्रथम उद्देश्य पिछड़े राज्यों को पहले कम से कम राष्ट्रीय औसत के स्तर पर लाने का होना चाहिए। उसके पश्चात उन्हें अन्य राज्यों के साथ आगे बढ़ने का अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने प्रदेश के समक्ष वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख करते हुए राज्य के पिछड़ेपन को दूर करने एवं प्रदेश के समग्र विकास के लिए वित्त आयोग से और अधिक अन्तरण की मांग की है।
मुख्यमंत्री आज यहां योजना भवन में 14वें वित्त आयोग के अध्यक्ष डा. वाई.वी. रेड्डी के नेतृत्व में आए आयोग के सदस्यों प्रो. अभिजीत सेन, सुषमा नाथ, डा. एम. गोविन्दा राव, डा. सुदीप्तो मुंडले एवं सचिव ए.एन. झा के साथ विचार-विमर्श कर रहे थे। इस उच्चस्तरीय बैठक में लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव, स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन, पंचायतीराज मंत्री बलराम यादव, बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविन्द चौधरी तथा राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष एन.सी. बाजपेयी ने भी आयोग के समक्ष प्रदेश सरकार का पक्ष रखा।
मुख्यमंत्री द्वारा केन्द्रीय अन्तरण के अतिरिक्त प्रदेश को सहायता अनुदान तथा राज्य विशिष्ट अनुदान के तहत 72526 करोड़ रुपये की सहायता की मांग वित्त आयोग से की गई। इसमें बेसिक शिक्षा में सर्वशिक्षा अभियान के लिए 9928 करोड़ रुपये, बेसिक शिक्षा में मूलभूत सुविधाओं हेतु 3465 करोड़ रुपये, माध्यमिक शिक्षा के लिए 1075 करोड़ रुपये, उच्च शिक्षा हेतु 1947 करोड़ रुपये तथा प्राविधिक शिक्षा के लिए 698 करोड़ रुपये की मांग सम्मिलित है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए 3914 करोड़ रुपये, प्रशासन स्तर के उन्नयन के तहत पुलिस प्रशासन हेतु 6039 करोड़ रुपये, कारागार प्रशासन हेतु 1438 करोड़ रुपये तथा जिला प्रशासन के सुदृढ़ीकरण के तहत नये जिलों की मूलभूत अवस्थापना सुविधाओं हेतु 1820 करोड़ रुपये की मांग की गई। प्रदेश में सड़कों एवं पुलों के रख-रखाव के लिए 19197 करोड़ रुपये तथा सिंचाई सुविधाओं के अनुरक्षण के लिए 8182 करोड़ रुपये की मांग प्रस्तुत की गई। प्रदेश की विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए कुल 10108 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भी सम्मिलित किया गया। इसमें अल्पसंख्यकों के लिए शैक्षणिक हब तथा आई.टी.आई. एवं मूलभूत सुविधाओं हेतु 739 करोड़ रुपये, पूर्वी उत्तर प्रदेश में जापानी इंसेफेलाइटिस के निराकरण हेतु 531 करोड़ रुपये तथा राज्य के पिछड़े गांवों में सी.सी. सड़क व के.सी. ड्रेन के लिए 2504 करोड़ रुपये की मांग भी सम्मिलित है।
आयोग के समक्ष प्रमुख सचिव, वित्त आनन्द मिश्रा द्वारा राज्य की राजकोषीय स्थिति एवं आयोग के निदेश पदों पर एक प्रस्तुतीकरण किया गया। इसके अतिरिक्त प्रमुख सचिव गृह अनिल कुमार गुप्ता, प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य प्रवीर कुमार तथा प्रमुख सचिव ऊर्जा संजय अग्रवाल द्वारा भी अपने विभागों के प्रस्तुतीकरण किये गये।
आयोग के निदेश पदों के संबंध में राज्य सरकार का मत रखते हुए प्रमुख सचिव, वित्त ने अपने प्रस्तुतीकरण में प्रदेश की क्षेत्रीय विषमताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारत एवं उत्तर प्रदेश के सम्बन्ध में तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत किए तथा प्रदेश के पिछड़ेपन को दूर करने एवं सभी क्षेत्रों तथा वर्गो के विकास हेतु आयोग के समक्ष अन्य राज्यों की तुलना में केन्द्रीय करों में उत्तर प्रदेश को और अधिक अन्तरण की मांग रखी। विगत वर्षों में राज्यों पर सामाजिक तथा अवस्थापना सुविधाओं के विकास हेतु हुए व्यय, शान्ति व्यवस्था कायम रखने में राज्यों की परम्परागत भूमिका में हुई वृद्धि एवं त्रिस्तरीय प्रशासन के सुदृढ़ीकरण में राज्यों के बढ़े हुए दायित्वों को देखते हुए केन्द्रीय करों की राजस्व प्राप्तियों में राज्यों के अंश को वर्तमान 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 36 प्रतिशत करने का आग्रह केन्द्रीय वित्त आयोग से किया गया।
इस विभाज्य अंश को राज्यों के मध्य अन्तरण किये जाने के संबंध में राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2011 की जनसंख्या को 25 प्रतिशत, क्षेत्रफल को 5 प्रतिशत, वित्तीय क्षमता सूचकांक को 50 प्रतिशत तथा वित्तीय अनुशासन को 20 प्रतिशत भार देते हुए राज्यों का अंश निर्धारित करने का आग्रह किया गया।
इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा इस बात पर विशेष रूप से बल दिया गया कि राज्यों को अन्तरण के मामले में 1971 की जनसंख्या के स्थान पर 2011 की जनसंख्या का उपयोग किया जाय क्योंकि 40 वर्ष से पुराने जनसंख्या के आंकड़ों का उपयोग किया जाना व्यवहारिक नहीं है। वर्ष 2000 में उत्तराखण्ड के बन जाने के बाद 1971 की जनसंख्या के आंकड़ों प्रासंगिक नहीं रह गये हैं।
सहायता अनुदान के संबंध में राज्य सरकार द्वारा मत व्यक्त किया गया कि सहायता अनुदान की धनराशि के निर्धारण हेतु राज्यों की आवश्यकताओं के आंकलन में 2011 की जनसंख्या का उपयोग किया जाय तथा मुद्रास्फीति को भी ध्यान में रखते हुए अनुदान राशि स्वीकृत की जाय। इस संदर्भ में आयोग से यह भी अनुरोध किया गया कि पूर्व में 12वें एवं 13वें वित्त आयोग की भांति 14वें वित्त आयोग द्वारा भी राज्यों को समुचित सहायता अनुदान एवं राज्य विशिष्ट अनुदान की संस्तुति की जाय।
14वें वित्त आयोग से अनुरोध किया गया कि केन्द्र सरकार के निबल कर राजस्व के विभाज्य कोष (डिविजबल पूल) में निकायों का अंश 2.28 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.0 प्रतिशत कर दिया जाय। इसके अतिरिक्त नगरीय स्थानीय निकायों द्वारा नागरिक सुविधाओं को मानक के आधार पर उलब्ध कराये जाने एवं आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं के उन्नयन हेतु वर्ष 2015-2020 की अवधि में  2,12,658 करोड़ रुपये प्रदेश के नगर निगम, नगर पालिका परिषदों तथा नगर पंचायतों को सहायता अनुदान के रूप में उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया। इसी प्रकार ग्रामीण पंचायतीराज संस्थाओं में परिसम्पत्तियों के रख-रखाव एवं नागरिक सुविधाओं के उन्नयन हेतु वर्ष 2015-2020 की अवधि में लगभग 70,485 करोड़ रुपये की सहायता की मांग 14वें वित्त आयोग से की गई।
आयोग के संज्ञान में यह तथ्य भी लाया गया कि केन्द्र सरकार द्वारा कतिपय राज्यों (उत्तर प्रदेश सहित) की विद्युत वितरण कम्पनी की गिरती हुई वित्तीय स्थिति के दृष्टिगत एक वित्तीय पुनर्संरचना योजना बनाई गई है। इस योजना के अन्तर्गत राज्य सरकार को वितरण कम्पनियों के अत्यधिक वित्तीय दायित्वों को अपने ऊपर लेने की वचनबद्धता देनी थी, जिसे प्रदान किया गया है। इससे राज्य के वित्त पर व्यापक प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। आयोग से यह अनुरोध किया गया है कि वित्तीय पुर्नगठन की इस योजना से राज्य वित्त पर पड़ने वाले व्यापक प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए वित्त आयोग राज्य को अपनी संदर्भ अवधि में (1.4.2015 से 31.3.2020) विशेष सहायता प्रदान करें, ताकि राज्य इस योजना से राज्य वित्त पर पड़ने वाले भार की कठिन स्थिति से उभर सकें।
राज्य सरकार द्वारा वित्त आयोग के समक्ष यह तथ्य रखा गया है कि राज्य द्वारा वित्तीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंध अधिनियम के अन्तर्गत निर्धारित वित्तीय अनुशासन के लक्ष्यों को पूरा किया गया है। राज्य सरकार राजस्व बचत की स्थिति में है, राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3 प्रतिशत के स्तर से कम है तथा ऋण एवं सकल घरेलू उत्पाद का अनुपात अधिनियम में निर्धारित स्तर से कम है। इस प्रकार राज्य सरकार वित्तीय अनुशासन की दिशा में पूर्णतया अग्रसर है। अतः ऐसे राज्य जिनके द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को पूरा किया जाता है के लिए प्रोत्साहन योजना की संस्तुति भी आयोग द्वारा की जानी चाहिए।
14वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने राज्य सरकार द्वारा प्रेषित ज्ञापन पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री, मंत्रीगणों तथा राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा उठाये गये बिंदुओं को ध्यानपूर्वक सुना तथा राज्यों के लिये अपनी संस्तुतियां करते समय उत्तर प्रदेश की समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन भी दिया। अध्यक्ष, 14वां वित्त आयोग डा. रेड्डी ने लखनऊ भ्रमण हेतु की गयी व्यवस्थाओं के लिये प्रदेश सरकार को धन्यवाद भी ज्ञापित किया।
मुख्य सचिव जावेद उस्मानी द्वारा अध्यक्ष एवं सदस्यों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए यह आशा व्यक्त की गयी कि 14वें वित्त आयोग द्वारा संस्तुतियाँ देते समय उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य की समस्याओं एवं आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जायेगा क्योंकि अगले 5 वर्षो में आयोग की संस्तुतियों का प्रदेश के विकास पर निर्णायक एवं दूरगामी प्रभाव पडे़गा। इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक रंजन, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री राकेश गर्ग सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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