उत्तराखंड के आपदा पीड़ितों के सिर पर मंडरा रही मौत

सड़क किनारे तंबू लगा कर गुजर-बसर करते आपदा पीड़ित
सड़क किनारे तंबू लगा कर गुजर-बसर करते आपदा पीड़ित

                                                          किरन कांत

उत्तराखंड के लोगों के साथ देश भर से आये सैकड़ों लोगों को 16-17 जून की रात में आसमान से बरसी आफत ने निगल ही लिया था, लेकिन जो बच गये थे, वे भी सिर्फ जिंदा ही हैं, क्योंकि उनका सब कुछ उस आपदा ने छीन लिया था। उस दर्दनाक आपदा से भी बड़े दुःख की बात अब यह है कि राज्य सरकार 6 महीने बाद भी पीड़ितों को एक अदद छत भी मुहैया नहीं करा पाई है। ठंड से खून जमने के कगार पर है और प्रशासन अभी तक सिर्फ आपदा पीड़ितों को सुविधायें देने का प्रस्ताव बनाने की तैयारी में ही जुटा नज़र आ रहा है, जिससे बुजुर्ग, बीमार और बच्चों के सिर पर मौत मंडराती नज़र आ रही है।

कुदरत ने पहाड़ के लोगों से उनका सब कुछ छीन ही लिया, लेकिन जिन लोगों की जान बच गई थी, वे अब तक सड़कों के किनारे तंबू लगाकर जिंदगी गुजारते नज़र आ रहे थे। दिन भर मेहनत कर रोटी जुटा लेते थे, तो किसी तरह रात तंबू में गुजर ही जाती थी, लेकिन अब तक गर्मी का मौसम था, पर अब जानलेवा ठंड ने दस्तक दे दी है। उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में तापमान शून्य ङिग्री से नीचे चला जाता है। कई-कई दिनों तक बर्फ जमी रहती है, ऐसे में पक्के घरों के बिना यह लोग कैसे रहेंगे, यह सोच कर भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं, पर सरकार को इनकी जान की कोई फ़िक्र नहीं है, तभी इनके रहने का अभी तक कोई स्थाई प्रबंध नहीं हो पाया है।

चमोली की कलावती और मनवीर ही नहीं, बल्कि उनके जैसे सैकड़ों परिवारों के लोग दहशत में हैं, पर इनकी ओर किसी का ध्यान तक नहीं है। चमोली के ङीएम एस. ए. मुरुगेशन का कहना है कि पीड़ितों को राहत देने के प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे जा रहे हैं। जिलाधिकारी की ही बात को सही मानें, तो अभी प्रस्ताव ही नहीं गये हैं, ऐसे में मंजूरी और पीड़ितों के रहने की व्यवस्था करने में कितना समय लगेगा, इसका अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है।

इस बारे में भाजपा नेता व पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खंडूरी ने आपदा पीड़ितों को अभी तक राहत नहीं दिये जाने को लेकर सरकार की घोर लापरवाही तो बताया, पर वह यह नहीं बता पाये कि आपदा पीड़ितों को छत कैसे मिलेगी?

उल्लेखनीय है कि आपदा के बाद देश भर से उत्तराखंड को मदद दी गई, लेकिन उत्तराखंड की लापरवाह सरकार उस मदद को पीड़ितों तक सही से पहुंचा तक नहीं पा रही, जिससे पीड़ितों की हालत लगातार बदतर होती जा रही है

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