अधिकारियों की उदासीनता से प्रदेश सरकार की छवि धूमिल

नगर विकास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आज़म खाँ
नगर विकास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आज़म खाँ
प्रदेश के नगर विकास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आज़म खाँ ने राजीव आवास योजना की धीमी प्रगति पर अपना गहरा असंतोष व्यक्त करते हुये कहा कि यह स्थिति ठीक नहीं है और इससे प्रदेश सरकार की छवि खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि इन असंतोषजनक हालात के लिये संबंधित अधिकारी पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। यदि इन अधिकारियों ने इस योजना के क्रियान्वयन में जरा भी दिलचस्पी ली होती, तो आज इसके तहत शहरी स्लम बस्तियों में रहने वालों के लिये बनाये जाने वाले मकान किसी न किसी रूप में जमीन पर बनते हुये नजर आते, लेकिन यह बड़े अफ़सोस की बात है कि पिछले दो-एक साल से चल रही यह योजना अभी भी कागजों तक ही सीमित है और विभिन्न विभागों के मकड़जाल में उलझ कर रह गयी है।
आज़म खाँ आज लखनऊ स्थित विधान भवन में भारत सरकार द्वारा संचालित राजीव आवास योजना के तहत हुई प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। इस बैठक में ही प्रदेश के आठ शहरों-गाजियाबाद, झांसी, अलीगढ़, बरेली, गोरखपुर, शाहजहाँपुर, इलाहाबाद तथा सहारनपुर में योजना के तहत 25171 लाख रुपये की लागत से कुल 4390 मकानों को बनाये जाने संबंधी प्रस्ताव का अनुमोदन किया जाना था। किन्तु योजना की प्रगति से पूरी तरह से असंतुष्ट होने के कारण उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि वे योजना की राह में आने वाली सभी बाधाओं का पहले निराकरण कर पूर्व में अनुमोदित प्रस्तावों पर कार्य शुरू करें और फिर उसके बाद नये प्रस्तावों को एक उच्चस्तरीय बैठक में अनुमोदन के लिये पेश किया जाये। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सिर्फ काग़जी कार्यवाही से काम नहीं चलने वाला है। प्रदेश की जनता, खासकर गरीब व शहरी मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग रिजल्ट चाहते हैं। आखिर कब तक ये लोग अधिकारियों की उदासीनता का शिकार बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि कार्यों के प्रति अधिकारियों की उदासीनता के चलते सत्ता में रहने वाले राजनैतिक दल को जनता के ग़म-ओ-ग़ुस्से का शिकार बनना पड़ता है।
राजीव आवास योजना के तहत रामपुर, रायबरेली (दो फेस), लखनऊ, आगरा, कानपुर नगर व कन्नौज शहर की स्लम बस्तियों में 3168.17 लाख रुपये की लागत में 2584 मकान बनाये जाने के प्रस्ताव भारत सरकार द्वारा अनुमोदित कर दिये गये है, लेकिन अभी सिर्फ रायबरेली शहर में ही आवास निर्माण शुरू हुआ है, जबकि अन्य शहरों की परियोजनायें किसी न किसी विभागीय स्तर पर लम्बित हैं। इसी तरह मथुरा, मुजफ्फरनगर, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, वाराणसी, मेरठ और इटावा शहरों की स्लम बस्तियों में कुल 25438.94 लाख रुपये की लागत से 3781 आवास बनाये जाने के प्रस्ताव भारत सरकार के विचाराधीन हैं।
नगर विकास मंत्री ने अधिकारियों को इस योजना के तहत पूर्वी उत्तर प्रदेश व बुन्देलखण्ड क्षेत्रों के शहरों को भी शामिल करने के निर्देश दिये। बैठक में प्रमुख सचिव, नगर विकास सी0बी0 पालीवाल, सूडा के निदेशक रविन्द्र नायक व संबंधित विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी तथा प्रस्तावित शहरों के जन प्रतिनिधि मौजूद थे।
उधर सूडा के निदेशक के. रवीन्द्र नायक का आज शासन ने एक बार फिर तबादला कर दिया। उन्हें अब पशु धन और मत्स्य विभाग का सचिव बनाया गया है। माना जा रहा है कि श्री नायक का तबादला आजम खां की नाराजगी के चलते ही किया गया है।

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